उस दिन शाम के प्रज्ञा शून्य भाषण और इन दिनों सारे कानूनों, परम्पराओं, संवेदनाओं और मानवता को ठेंगा दिखाकर की जा रही आपराधिक बेहूदगियों को देखकर दो घटनाएं याद आईं। पहली सितम्बर 2008 की है। दिल्ली में हुए बम धमाकों के बाद तब के गृह मंत्री शिवराज पाटिल जब शनिवार रात में प्रेस से बातचीत