वर्धा. महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा के कुलाधिपति प्रो. कमलेशदत्त त्रिपाठी ने कहा है कि भारत में दर्शन की लंबी परंपरा है परंतु नई पीढ़ी हमारे दार्शनिकों से अपरिचित है। हमारी परंपरा और मूल पर ही आघात हो रहे हैं और अतीत को भुलाया जा रहा है। हमें परंपरा और नवीनता के जुड़़ाव और