नोएडा. विगत 1 वर्ष में जिस तरीके से कोरोना ने पैर पसार के अपना कहर सारे विश्वपटल पे मचाया हुआ है,वही भारत मे हर दिन जरूरतमंदों को रक्त की कमी ने लोगो की जान ले रखी है। अभी कोरोना के कारण लगभग 30 लाख से ज्यादा रक्त यूनिट की कमी पाई गई है इसमें भी
समाजसेवी और राजनीतिक विश्लेषक प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने विगत कुछ समय से चल रहे किसान आंदोलन के मद्देनजर मीडिया के माध्यम से कहा है कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और अगर इस देश में किसानों को ही अपने अधिकारों के लिए आंदोलित होना पड़े तो इससे चिंताजनक कुछ भी नहीं हो सकता है। जिस
बिलासपुर. विगत कई वर्षों से भीख मांग कर गुजारा करने वाली 65 वर्षीय शांति यादव जो कि यादव मोहल्ला तालापारा के शासकीय स्कूल की सीढ़ी के नीचे बेसुध से पड़ी रहती थी और गिरते स्वास्थ्य के कारण काया भी जीर्ण शीर्ण हो गई थी। इस बेसहारा महिला के बारे में मोहल्ले वासियों शैलेन्द्र अग्निहोत्री, प्रेमा
बिलासपुर. बिलासपुर पुलिस के द्वारा विगत कुछ माह में चाहे वह कोरोना महामारी पर जागरूकता अभियान ,साइबर अपराध के रोकथाम हेतु जागरूकता अभियान, सामुदायिक पुलिस पर अभियान, महिलाओ पर अपराध के प्रति लोगों को जागरूक करने वाली रक्षा टीम के द्वारा चलाया गया अभियान, अपराधियों की धरपकड़ के लिए चलाया गया अभियान, विभिन्न विषयों पर
बिलासपुर. आदर्श पंजाबी महिला संस्था का स्थापना दिवस विगत 28 वर्षो से हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता था। इस अवसर पर गिद्दा भांगड़ा के साथ कई परिवारिक आयोजन भी कराए जाते थे । उमंग उल्लास भरे कार्यक्रम में युवक- युवतियां, महिला पुरुष एवं तथा बच्चे भी स्टेज पर आकर अपनी प्रस्तुति देते रहे। लेकीन कोविड
बिलासपुर. विगत 5 जून 2020 को केंद्र सरकार द्वारा कृषि व्यापार के संदर्भ में 3 अध्यादेश लाये गए थे। इन अध्यादेशों का उद्देश्य सरकार ने यह बताया है कि इससे किसान देश भर में कही भी उपज बेच सकेगा। अब इन अध्यादेश को कानून का रूप देने के लिए संसद में रख कर सरकार ने
जगदलपुर. विगत महीनों में बस्तर संभाग अंतर्गत नक्सलियों के विरुद्ध प्रभावी अभियान संचालित करने के परिणाम स्वरूप अनेक माओवादियों की डेरा को ध्वस्त किया गया तथा कई नक्सलियों की शव बरामद भी किया गया। नक्सली आंदोलन में भविष्य नही होने की बात को समझते हुये काफी बड़ी तादात में नक्सलियों द्वारा आत्मसमर्पण भी किया गया
विगत 7 वर्षो से भारतीय राजनीति मे जो गिरावट आयी है उसके मोदी जी और अमित शाह जी अहम करदार है। कार्पोरेट्स की शह पर तत्कालीन यूपीए सरकार को बदनाम करने की जो मुहिम इन्होने चलाई, उसमे सफल भी रहे, लेकिन भारतीय राजनीति व लोकतंत्र का जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई शायद जल्दी संभव नही होगी। सरकार मे बैठे अवसरवादियों