दुकानदारी की तर्ज पर संचालित हो रहा तहसील कार्यालय

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बिलासपुर. मोपक औऱ आसपास की निजी व सरकारी जमीनों पर इन दिनों खतरा मंडराने लगा है। उल्टे सीधे कार्यो को अंजाम देने में लगे बेलगाम अधिकारी यहाँ अधिकांस सरकारी व निजी जमीनों को बेच चूके है वहीं वर्तमान रिकार्ड में दर्ज ग्राम चिल्हाटी के 12 एकड़ तालाब को गायब कर कालोनी निर्माण किया चुका है। मोपका, लिंगियाडीह और चिल्हाटी की सरकारी जमीनों में किये गए भस्टाचार की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी से कराये जाने पर दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। चिल्हाटी के खसरा नंबर 224 में भारी घालमेल किया गया है। सरकारी व निजी जमीनों से साथ साथ आदिवासी व जंगल मद की जमीनों को हथियाने रसूखदार  भूमाफिया खुलेआम रंगदारी पर उतर आए है। तहसील कार्यालय का संचालन भी इन्ही के रहमो करम पर चल रहा है। जमीन मालिकों को नामातंरण,सीमांकन के नाम पर थकाया जा रहा हैं। एक ओर जहां तहसील में चल रहे भर्राशाही को लेकर वकील आंदोलन की तैयारी में है तो वहीं दूसरी ओर  राजनीतिक संरक्षण हासिल कर चुके तहसील के अधिकारी व कर्मचारी भूपेश सरकार की बदनाम करने में तुले हैं।  मोपका मुख्य मार्ग चुन्नी तालाब के बाजू की खाली पड़ी जमीन को लेकर जमकर विवाद हुआ। सत्ता के दम पर इस जमीन को हथियाने सारे नियमो ताक पर रखकर तरह तरह के हथकंडे अपनाये जा रहे है। खाली जमीनी हमारी है का नारा लगाने वाले नेताओं की इन दिनों तूती बोल रही है।

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