कलेक्टर के निर्देश के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था, अधिवक्ताओं ने लगाये तहसीलदार मुर्दाबाद के नारे


बिलासपुर/अनिश गंधर्व. तहसील कार्यालय में समय से अधिकारी बैठ नहीं रहे हैं, प्रकरणों की सुनवाई नहीं हो रही है। विगत एक सप्ताह से स्थिति जस की तस है।  जिसके चलते पक्षकार और अधिवक्तागण परेशान हैं। लोक अदालत में जिन प्रकरणों को निपटाने के आदेश दिये गये थे अभी तक उन पर भी कोई काम नहीं हो सका है बार-बार तिथि बढ़ाई जा रही है। नायब तहसीलदार अपने पद की गरिमा से विपरित काम कर रहे हैं। इस संबंध में पूर्व में जिला कलेक्टर को तहसील कार्यालय के अधिवक्ताओं ने अवगत कराया था इसके बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है। तहसील में चल रहे भर्राशाही के खिलाफ आगामी दिनों में वकीलों द्वारा कलमबंद आंदोलन किया जाएगा। वकीलों ने कहा कि कोई भी पदाधिकारी हो या सदस्य किसी का  न्यायालय में कोई मान्यता नहीं है। वकीलों ने कहा कि सुचारू रूप से बार और बेंच जो एक दूसरे के समन्वयक हैं इसके बाद भी कोई महत्व नहीं दिया जा रहा है, एक पक्षकार से ज्यादा खराब स्थिति वकीलों की हो गई हैं। जमीन दलालों के साथ अधिकारी चेंबर में बैठकर चाय पीते हैं। उनके कहे अनुसार जमीनों इधर उधर करते हैं कोई वकील इस दौरान जाता है तो दरवाजा बंद कर दिया जाता है। इस तरह की गतिविधियों से जूझकर आज के दौर में वकील तहसील कार्यालय में काम करने को मजबूर हैं। अधिवक्ताओं ने इतना आक्रोश था कि वे चंदन केसरी संवाददाता के समक्ष ही तहसीलदार मुर्दाबाद का नारा लगाने से पीछे नहीं हटे सभी ने एक स्वर में तहसीलदार, नायब तहसीलदार, अतिरिक्त तहसीलदार के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाते रहे। बीते दिनों जिला कलेक्टर तहसील में चल रहे गतिविधियों को लेकर दौरा करने पहुंचे थे इस दौरान उन्होंने लोक अदालत और शिविर लगाकर प्रकरणों के निपटाने के निर्देश दिये थे। किंतु लोक अदालत और शिविर में भी दो चार से ज्यादा मामलों को नहीं सुलझाया जा सका। आज की स्थिति में भी लंबित पड़े मामले फिर से धूल खा रहे हैं। बताया जा रहा है कि बिलासपुर तहसील पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार के नाम पर चर्चित हो चुका हैं। भ्रष्ट अधिकारियों के मनमाने रवैये के कारण सरकारी जमीनें चलने और उडऩे लगी है। जमीन दलालों के लिये बिलासपुर तहसील इन दिनों स्वर्ग बना हुआ है। तालाब, सरकारी व आदिवासी मद की जमीनों में जमकर घालमेल किया गया है।

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