न खाता न बही, निगम  और अध्यक्ष कहे वो ही सही, पटाखा वालो से कह रहे पैसा दे पैसा दे पिछला बकाया के साथ पहली बार मांग रहे व्यवसाय शुल्क भी

0 पुलिस का ग्राउंड न सफाई कराई न भेजा फायर ब्रिगेड फिर भी बता रहे पिछला
0 पुलिस और प्रशासन को भी कर रहे बदनाम लेते है उनके पटाखे के लिए चंदा

बिलासपुर। निगम प्रशासन और पटाखा व्यापारी संघ ने कारोबारियों को पैसे का पेड़ समझ लिया है। हद हो गई जो आज तक नही लगा वो व्यवसाय शुल्क और पिछला बकाया मांगा जा रहा वो भी बिना किसी भूमिका के। कारोबारियों का कहना है कि मैदान पुलिस का न सफाई के लिए अमला भेजा न फायर बिग्रेड। मैदान छोड़ते समय 18 हजार में मैदान की सफाई खुद कराई तो किस बात का पिछला बकाया और ये नया व्यवसाय शुल्क क्यो।

गवर्नमेंट स्कूल मैदान के बाद 2 साल से दिवाली का पटाखा बाजार पुलिस ग्राउंड में लगते आ रहा था। इस बार अरपापार साइंस कॉलेज मैदान में शिफ़्ट होने की बात कही जा रही पिछले साल दिवाली में पुलिस मैदान में पटाखे की 98 दुकाने लगी थी। जिसका 13 लाख इकट्ठा करने के बाद 12 लाख रुपये पुलिस विभाग में संघ ने जमा कराया। निगम प्रशासन ने न तो 12 दिन यहां सफाई कराई और न फायर ब्रिगेड भेजी अब पटाखा कारोबारियों से पिछला बकाया बता निगम वाले 4500-4500 रुपये मांग रहे ये कहना है पटाखा कारोबारियों का। जबकि उसके पहले साल 1 रुपये भी नही लिया गया था।

18 हजार चंदा ले कराए सफाई

पुलिस विभाग को मैदान के किराए का 13 लाख एकत्र करके देने के बाद फिर चंदा करके संघ ने छोडते समय पुलिस मैदान की सफाई करा 18000 रुपए सफाई कराने का भी दिया।

डेढ़ डेढ़ हजार वापस करने किया एलाउंस पर नही दिया

आरोप है पिछले साल पुलिस मैदान का किराया चुकाने संघ ने पटाखा करोबारियो से एकत्र 13 में से 12 लाख रुपये पुलिस डिपार्टमेंट में जमा कराने के बाद बचे 1 लाख रुपये में से सभी कारोबारियों को डेढ़-डेढ़ हजार वापस करने बकायदा एनाउंस किया गया पर दिया मीज़ी को नही गया। वो पैसा कहा गया बड़ा सवाल है।

इस बार व्यवसाय शुल्क भी

बताया जा रहा कि इतने सालों में पहली बार पटाखा कारोबारियों से इस साल व्यवसाय शुल्क मांगा जा रगा जो कभी नही लगा। कारोबारी पूछ रहे कि ये नया शुल्क क्यो, क्या एमआईसी से ऐसा कोई प्रस्ताव पास हुआ है।

इस बार ये मांग रहे

इस बार पटाखा कारोबारियों से 4500-4500 पिछला बकाया। 5500-5500 रुपया व्यवसाय शुल्क और 12-12 हजार रुपए टेंट और लाइट का भी देना होगा।

पुलिस और प्रशासन के लिए भी चंदा

व्यापारियों का कहना है कि उनसे जिला पुलिस और निगम प्रशासन के अफसरों के पटाखे और मिठाई के नाम पर एक एक पटाखा दुकान वालो से संघ द्वारा 2250-2250 रुपये अलग से लिये जाते है। पर आज तक हिसाब नही दिया गया।

एक निगम, कितने विधान

सवाल यह भी कि निगम प्रशासन आखिर चलता कितने विधान से है। ये हम नही पटाखा कारोबारी पूछ रहे। उनका कहना है कि रेलवे परिक्षेत्र में भी सालों से पटाखा बाजार लग रहा निगम प्रशासन उनसे कोई शुल्क नही ले रहा। इधर महज 3 लाख रुपये में गोड़पारा के पंडित मुन्नूलाल स्कूल परिसर को 4 माह के लिए तिब्बती उलन मार्केट वालो को किराए पर दे दिया। तो शहर के गरीब पटाखा कारोबारियों से 12 दिन के लिए इतना भारी भरकम किराया व्यवसाय शुल्क और दुनिया भर के शुल्क क्यो लादे जा रहे।

कह रहे थाना सेट कर अपनी जगह करेंगे कारोबार

इधर प्रशासन की इस मनमानी और भारी भरम शुल्क को लेकर नाराज बड़े पटाखा कारोबारी इतना शुल्क देकर शहर के आउटर साइंस कॉलेज में दुकान लगाने से कतरा रहे। उनका कहना है कि इसके बजाय वे थानों में सेटिंग कर अपनी दुकानो से ही कारोबार करेंगे। उनके बंधे ग्राहक तो उनसे कही से भी पटाखा खरीदने तैयार है।

विधायक और सभापति से भी मिले

पटाखा कारोबारियो का कहना है कि वे पिछला बकाया और नए व्यवसाय शुल्क को लेकर वे निगम के सभापति और पूर्व मंत्री व नगर विधायक अमर अग्रवाल को भी अवगत करा गुहार लगा चुके। इन नेताओं ने निगम आयुक्त से चर्चा कर उन्हें वस्तुस्थित से अवगत भी करा दिया।

 

क्या कह रहे संघ के अध्यक्ष
सही है पर प्रशासन से लड़ तो नही सकते। अपनी बात रखेंगे यदि कारोबारी थाने को सेट करने की बात कह रहे तो कर सकते है वैसे भी पूरे शहर में पटाखे तो बेचे ही जा रहे। प्रशासन को पटाखे के लिए चंदा देने की बात गलत है आप भी समझते है थोड़ा बहुत तो करना पड़ता है पर ये आंतरिक मॉमला है।

सुनील वाजपेयी, अध्यक्ष पटाखा व्यापारी संघ

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