बच्चों को सोशल मीडिया के लत से बचाएगा ये बिल, कंपनियों को देना होगा प्राइवेसी का विकल्प

वाशिंगटन. आज की जिंदगी में इंटरनेट का चलन काफी तेजी से बढ़ा है. इसका सबसे बड़ा कारण लोगों का सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना भी है. हालांकि, इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर बच्चे और किशोर भी कर रहे हैं, जिससे उन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है. इसके लिए अभिभावकों द्वारा लगाम कसने की कोशिश की जाती है, लेकिन वह नाकाफी होती है. ऐसे में जरूरी है कि सोशल मीडिया कंपनियों के लिए कुछ ऐसे नियम बनाए जाएं, जिससे बच्चों को इसका इस्तेमाल करने से रोका जा सके.

अमेरिका ने पेश किया बिल

वहीं, इस कड़ी में सबसे पहला कदम अमेरिका ने उठाया है. यहां सोशल मीडिया के बच्चों पर पड़ रहे नकारात्मक असर को देखते हुए सोशल प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती के लिए ‘किड्स ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट-2022’ पेश किया है. यह बिल रिपब्लिकन पार्टी की मार्शा ब्लैकबर्न और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने पेश किया है. ब्लैकबर्न का कहना है कि सोशल मीडिया का नकारात्मक असर बच्चों और किशोरों पर ज्यादा पड़ रहा है. इसकी टेक कंपनियों को जरा भी चिंता नहीं है, इसलिए नकेल कसना जरूरी है.

16 साल से कम उम्र के बच्चों पर हो रही थी सुनवाई

बता दें कि अमेरिकी कांग्रेस ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया के पड़ रहे असर पर सुनवाई के बाद यह बिल पेश किया गया है. ब्लूमेंथल का कहना है कि बिल को दोनों ही पार्टियों का समर्थन है, इसलिए बिल को पास होने में कोई समस्या नहीं आएगी.

प्राइवेसी का देना होगा विकल्प

बिल के मुताबिक, सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर्स को प्राइवेसी विकल्प देना होगा. ‘लत’ वाले फीचर्स को डिसेबल करने के साथ पेज या वीडियो को लाइक करने से ऑप्ट आउट करने की सहूलियत देनी होगी. वहीं, कंपनियों को ऐप में ऐसे टूल्स देने होंगे, जिनसे अभिभावकों को पता चल सके कि बच्चे ने सोशल मीडिया पर कितना समय बिताया है. इससे वे बच्चों ऐप के लत से बचा पाएंगे.

वैज्ञानिक डेटा पर करेंगे स्टडी

सोशल मीडिया कंपनियों को बच्चों से संबंधित डेटा शिक्षण, शोध संस्थानों और निजी शोधकर्ताओं के साथ शेयर करना होगा. इसके बाद शोधकर्ता इस डेटा का इस्तेमाल कर, सोशल मीडिया का बच्चों की मानसिक और शारीरिक स्थिति पर पड़ रहे नुकसान का आंकलन कर पाएंगे.

बच्चों को करना होगा जागरूक

इसके साथ ही सोशल मीडिया कंपनियों को बच्चों को होने वाले नुकसान को रोकने की दिशा में काम करना होगा, जिससे वह नशीले पदार्थों का सेवन, सुसाइड आदि के बारे न सोचें और इसके लिए जागरूक हो सकें.

तीसरा पक्ष करेगा कंपनियों की समीक्षा

बिल में यह बात भी कही गई है कि सोशल मीडिया कंपनियां नए नियमों का कितना बेहतर तरीके से पालन कर रही है, इसके लिए किसी तीसरे पक्ष को जिम्मेदारी देनी होगी, जो इन कंपनियों द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगी.

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