अयोध्या संगोष्ठी में नगर के तीन लोगों को मिली उपाधि

बिलासपुर. अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद् एवं प्रयास प्रकाशन बिलासपुर के तत्वावधान में थावे विद्यापीठ गोपालगंज (बिहार) द्वारा अयोध्या के उदासीन संगत ऋषि आश्रम, रानोपाली के भव्य एवं पावन परिसर में दीक्षान्त समारोह और राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 19 एवं 20 अक्टूबर को सम्पन्न हुआ। इस आयोजन में न्यायमूर्ति चन्द्रभूषण बाजपेयी को उनकी कृति ‘‘मेरी अन्तर्यात्रा‘‘, धर्मभूषण पं. श्रीधर गौरहा को उनकी कृति ‘‘महाविद्या-रत्नाकरः‘‘ और डा. आभा गुप्ता को उनकी कृति ‘‘श्रीमद्भागवत का अनुशीलन‘‘ पर विद्याासागर (डी.लिट्) की मानद् उपाधि से विभूषित किया गया।
बिलासपुर की तीनों विभूतियों को उनकी सारस्वत साधना, सुदीर्घ हिन्दी सेवा, महत्वपूर्ण उपलब्धियों तथा राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा के आधार पर विद्यापीठ की अकादमिक परिषद् की अनुशंसा पर 20 अक्टूबर को मानद उपाधि प्रदान की गई है।
विकलांग-विमर्श विषयक इस चौदहवीं राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रो.सुरेश माहेश्वरी (अमलनेर, महाराष्ट्र) के बीज-वक्तव्य, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं न्यायमूर्ति बाजपेयी के प्रमुख आतिथ्य एवं डॉ.विनय कुमार पाठक कुलपति थावे विद्यापीठ की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में डॉ.अशोक कुमार सनोडिया (इन्दौर), डॉ.प्रभा दुबे (नोएडा), डॉ. अर्चना पाण्डेय (दुर्ग), विष्णु कुमार तिवारी (मुंगेली), डॉ.श्रीधर गौरहा एवं डॉ.आभा गुप्ता (बिलासपुर) ने शोधपत्र का वाचन किया।
इस कार्यक्रम का संचालन डॉ.अरूण कुमार यदु ने किया तथा आभार प्रदर्शन पूर्व प्रतिकुलपति डा. अरविन्द आनन्द ने किया।

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