VIDEO हड़ताल अवैध : आंदोलन हो मगर सही मुद्दों पर हो – डॉ. जयसवाल

बिलासपुर. एनएफआईटी, आरसीएमसी और एचएमकेपी संघ के दो दिवसीय आयोजित हड़ताल को अवैध करार देते हुए एनएफआईटीयू ने समर्थन देने से साफ इंकार कर दिया है। एनएफआईटीयू के अध्यक्ष डा. दीपक जयवाल आज स्थानीय प्रेस क्लब में पत्रकारों चर्चा करते हुए कहा कि भीड़ बढ़ाने और नेतागिरी करने वालों के पक्ष में संगठन शुरू से नहीं रहा है। संगठन का शुरू से मुद्दा रहा है कि जिन किसानों की जमीनों को लिया गया उन्हें नौकरी दी जाये। फर्जी नियुक्ति न की जाये एसईसीएल में राज्य के लोगों को अवसर दिया जाये। उन्होंने जनरल मैनेजर की नियुक्ति को अवैध करार देते हुए कहा कि एसईसीएल में हजारों लोग फर्जी तरीके से नौकरी कर रहे हैं। खदानों में किये गये भ्रष्टाचार पर लीपापोती करने के लिये इस हड़ताल को कराया जा रहा है। काम पर जाने वाले मजदूरों को अपना हित साधने के लिये हड़ताल में शामिल किया जा रहा है। एसईसीएल काम काम करने वाले मजदूर इस हड़ताल को सहीं नहीं मान रहे हैं, उन्हें जबकिरया आंदोलन में शामिल किया जा रहा है। हमारे विरोध का असर दो दिन में आम जनता के सामने आ जायेगा।

 

उदाहरण के तौर पर यदि कोयला क्षेत्र के हमारी एसईसीएल में ही देखे तो जेबीसीसीआई या जेसीसी का हाल देख लीजिये, श्रमिक संगठनों के नाम पर कोई जायज पंजीकृत श्रमिक संगठनों को नहीं रेखा गया है बल्कि अवैध मजदूर संगठनों को रखा तथा नियोक्ता और इसके सदस्य करोड़ों रूपये की घपलेबाजी में शामिल हैं। मजदूरों के अधिकारों को पूरी तरह कुचला जा रहा है। जेबीसीसीआई और जेसीसी में बल पूर्वक सम्मिलित तथा कथित गैर मान्यता प्राप्त संगठन कामगारों से करोड़ों रूपये का वसूली उनकी सैलरी से प्रबंधन करता है और उनकी गाड़ी कमाई की लूट होती है। क्यों किसी संगठन के पदाधिकारी ने जेबीसीसीआई और जेसीसी से पद त्याग किया उनका ध्येय केवल मजदूरों की मेहनत पर मौज मस्तरी करना है। वास्तव में इस हड़ताल का मुख्य केन्द्र बिन्दु मजदूर हित न होकर अपनी स्वार्थ के लिये किया जा रहा है।
एनएफआईटीयू एक श्रमिक संगठन होने के नाते उसका रिश्ता भारत की कामगार किसान, मजदूरों के हितों से सीधा जुड़ा हुआ है। देश तथा देश की कमाने वाली जनता के प्रति इसका कर्तव्य भी है कि सरकार द्वारा चलायी जा रही श्रम कल्याण योजनाओं को सरकार के साथ भागीदारी करे हुए श्रमिक के हित के काम कर रहे हैं। हड़ताल की घोषणा अनैतिक है।

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