मरने के बाद बॉडी के साथ क्या-क्या होता है? श्मशान के कर्मचारी ने खोले राज

नई दिल्ली. हाल ही में श्मशान घाट की मैनेजर लॉरेन ने बताया कि अंतिम संस्कार के बाद डेड बॉडीज का क्या होता है. जो लोग डेड बॉडीज दफनाते हैं या कोफिन में रखते हैं उन डेड बॉडीज के साथ श्मशान घाट के लोग क्या करते हैं उसे जानकर आप भी दंग रह जाएंगे. लॉरेन ने बताया कि श्मशान में काम करना उनका सपना था. जब उनकी बतौर मैनेजर नौकरी लगी तो उनका सपना पूरा हुआ. लेकिन अब लॉरेन ने नौकरी छोड़ दी है और इस संबंध में कई रहस्यों का खुलासा किया है. आइए जानें इन रहस्यों के बारे में.

टिकटॉक पर किए खुलासे

खबर के मुताबिक लॉरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक पर अपनी नौकरी के बारे में कुछ ऐसे अज्ञात रहस्यों को खोला है जिससे हर कोई हैरान है. लॉरेन ने टिकटॉक पर अपनी इस पोस्ट पर फॉलोअर्स के सवालों के जवाब भी दिए हैं.

क्या करते हैं टैम्पोन या पैड का

लॉरेन ने बताया कि किसी डेड बॉडी जो कि जवान हो और पीरियड्स के दौरान उसकी डेथ हुई है तो उनकी बॉडी का पूरा परीक्षण किया जाता है. और उसी दौरान गंदे पैड्स और टैम्पोन को बॉडी से रिमूव किया जाता है. उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में फीमेल बॉडीज से टैम्पोन या पैड्स को केवल तभी हटाया जाता है जब शरीर को लंबे समय तक सुरक्षित रखना हो और शरीर की देखभाल करने के लिए परिवार ने सहमति दी हो. उन्होंने बताया कि अगर कोई दाह संस्कार होता, तो टैम्पोन या पैड्स की जांच नहीं की जाती.

ब्रेसिज को इसीलिए नहीं हटाया जाता

एक यूजर ने जब पूछा कि डेड बॉडी से ब्रेसिज को हटाया जाता है या नहीं तो लॉरेन ने बताया कि ब्रेसिज को भी हटा दिया जाता है अगर वह व्यक्ति उन्हें उतारने से पहले मर गया.लेकिन दाह संस्कार हो रहा है या दफनाने की प्लानिंग है तो बॉडी से ब्रेसिज नहीं हटाएं जाते सिर्फ बॉडी को सेफ रखना होता है तभी ब्रेसिज हटते हैं. हालांकि लॉरेन ने ये भी बताया कि उन्हें बॉडी से ब्रेसिज निकालने की ट्रेनिंग नहीं दी गई थी.

परिवार को सही अवशेष मिलते हैं या नहीं

इस सवाल के जवाब में लॉरेन ने कहा कि एक बार जब किसी को अंतिम संस्कार किया जाता है, तो हम उन्हें एक मैटल आईडी टैग मिलता है और वह टैग श्मशान प्रक्रिया के दौरान बॉडी के साथ रहता है. और फिर उसे बैग के साथ अंतिम संस्कार होने के बाद सील कर दिया जाता हैं. फिर मरने वाले व्यक्ति के नाम के साथ डेथ सर्टिफिकेट बनता है और उस नंबर को बैग पर टैग किया जाता है. इसीलिए अवशेष सही मिलती हैं और गड़बड़ होने की कोई गुंजाइश नहीं होती.

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