बिगड़ती कानून व्यवस्था पर अमित शाह मौन क्यों?
रायपुर. प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री जी छत्तीसगढ़ में लगातार आ रहे है लेकिन बिगड़ती कानून व्यवस्था पर एक शब्द नहीं बोलते है। भाजपा का वादा था कि भाजपा सरकार बनने पर छत्तीसगढ़ अपराध मुक्त होगा, दो दिन पहले राजधानी रायपुर में दो नाबालिग बच्चियों का भीड़ में अपहरण कर हवस का शिकार बना लेते है। महिला अपराध लगातार बढ़ती जा रही है। बस्तर से लेकर सरगुजा तक की महिलाएं भय के वातावरण में रहने को मजबूर है। अत्याचार, अनाचार की बढ़ती घटना से अभिभावक चिंचित रहते है। अपराधियों के हौसले बुलंद हो गये है, खुलेआम दिनदहाड़े अपराध को अंजाम दिया जा रहा है। गृहमंत्री जी को कानून व्यवस्था पर सुध लेनी चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा है कि विगत 30-40 दिनों से अधिक समय से अनशन पर बैठे मध्यान भोजन रसोईया संघ के दुलारी यादव और रुक्मणी सिन्हा की मौत को सरकार की संवेदनहीनता और प्रशासन की निर्ममता का परिणाम है।यह सरकार कर्मचारियों की मांगे सुनने के बजाय बर्बरता पर उतर आई है, ये साधारण मौत नहीं हत्या है, पीड़ित परिवारों को तत्काल मुआवजा और रसोईया संघ की मांगों को पूरा करे सरकार। 100 दिन के भीतर सभी अनियमित, संविदा कर्मचारियों को नियमित करने का वादा करके सत्ता में आयी भाजपा की सरकार अहंकारी हो गई है, क्रूरता पूर्वक दमन पर उतर आई है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा है कि भाजपा सरकार की वादाखिलाफी के चलते छत्तीसगढ़ में हर वर्ग आंदोलित है। 86 हजार से अधिक मध्यान भोजन रसोईयों में ज्यादातर ग्रामीण महिलाएं हैं जो छोटे-छोटे दुधमुंहे बच्चों को लेकर खुले आसमान के नीचे भरी ठंड में सवा महीने से आंदोलित हैं, तूता धरना स्थल पर जानबूझकर शौचालय, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाएं बाधित कर दी गई है, आंदोलनकारियों को जिम्मेदार नेता, मंत्री, और विधायक से मिलने से रोका जा रहा है, धक्का-मुक्की और मारपीट की जा रही है, अनशन के दौरान तबियत बिगड़ने पर एंबुलेंस तक की व्यवस्था नहीं किया जा रहा है। केंद्रीय गृहमंत्री को जवाब देना चाहिए। डबल इंजन की सरकार में अपने अधिकार के लड़ाई लड़ते-लड़ते महिलाएं मर रही है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा है कि डीएड अभ्यर्थियों के पक्ष में तो माननीय सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय है, लगभग आधे पदों पर भर्ती प्रक्रिया हो भी चुकी है, लेकिन इस सरकार की दुर्भावना के चलते ही बाकी के शेष अभ्यर्थी अन्याय के शिकार होकर आंदोलन करने मजबूर हैं। लेकिन सरकार आने के बाद से अपने वादे और मोदी की गारंटी से भाजपा की सरकार पलट गई है, नौकरी की मांग को लेकर विगत एक महीने से धरने पर बैठे सीएएफ अभ्यर्थियों से धक्का-मुक्की और मारपीट पर उतारू है यह सरकार, लंबे समय से अनशन पर बैठी एक महिला अभ्यर्थी की तबीयत बिगड़ने पर एंबुलेंस तक को नहीं जाने दिया गया, यह इस सरकार की अमानवीयता की पराकाष्ठा है। गृह मंत्री को डीएड अभ्यार्थियों से मुलाकात कर उनकी मांगों को पूरा करना चाहिए।


