आदर्श योग आध्यात्मिक केन्द्र के योग साधकों ने धूमधाम से मनाया महाशिवरात्रि का पर्व


भोपाल. महाशिवरात्रि के अवसर पर आदर्श योग आध्यात्मिक केन्द्र के योग साधकों द्वारा स्थान कलिया सोत डेम के मध्य स्थित प्राचीन विश्वनाथ मंदिर भोपाल सुबह प्रातः 8 बजे से पर्व धूमधाम से सामूहिक योग साधना एवं आदि योगी भगवान शिव की पूजन अभिषेक करके मनाया गया | इस अवसर पर सम्मानीय योग गुरूजी, सामाजिक संस्थाओ के अध्यक्ष एवं पदाधिकारी रहवासी समितिओं के पदाधिकारी, प्रकृति प्रेमी धर्म प्रेमी भाई बहन एवं बच्चे उपस्थित रहें |


इस अवसर पर योग गुरु महेश अग्रवाल ने कहा कि सत्य ही शिव हैं और शिव ही सुंदर है। तभी तो भगवान आशुतोष को सत्यम शिवम सुंदर कहा जाता है। भगवान शिव की महिमा अपरंपार है। भोलेनाथ को प्रसन्न करने का ही महापर्व है…शिवरात्रि…जिसे त्रयोदशी तिथि, फाल्गुण मास, कृष्ण पक्ष की तिथि को प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है। महाशिवरात्रि पर्व की विशेषता है कि सनातन धर्म के सभी प्रेमी इस त्योहार को मनाते हैं। महाशिवरात्रि के दिन भक्त जप, तप और व्रत रखते हैं और इस दिन भगवान के शिवलिंग रूप के दर्शन करते हैं। इस पवित्र दिन पर देश के हर हिस्सों में शिवालयों में बेलपत्र, धतूरा, दूध, दही, शर्करा आदि से शिव जी का अभिषेक किया जाता है।


देश भर में महाशिवरात्रि को एक महोत्सव के रुप में मनाया जाता है क्योंकि इस दिन देवों के देव महादेव का विवाह हुआ था। हमारे धर्म शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि महाशिवरात्रि का व्रत करने वाले साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। जगत में रहते हुए मुष्य का कल्याण करने वाला व्रत है महाशिवरात्रि। इस व्रत को रखने से साधक के सभी दुखों, पीड़ाओं का अंत तो होता ही है साथ ही मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है। शिव की साधना से धन-धान्य, सुख-सौभाग्य,और समृद्धि की कमी कभी नहीं होती। भक्ति और भाव से स्वत: के लिए तो करना ही चाहिए साथ ही जगत के कल्याण के लिए भगवान आशुतोष की आराधना करनी चाहिए। मनसा…वाचा…कर्मणा हमें शिव की आराधना करनी चाहिए। भगवान भोलेनाथ..नीलकण्ठ हैं, विश्वनाथ है।

आदियोगी शिव : पहले योग गुरु है |सभी धर्मों से भी बहुत पहले, पहले योगी, आदियोगी हिमालय में प्रकट हुए।आदियोगी ने व्यक्तिगत रूपांतरण के साधन दिए क्योंकि यही संसार के रूपांतरण का एकमात्र उपाय है। उनका बुनियादी संदेश है, “अंदर की ओर मुड़ना” ही मनुष्यों के कल्याण और मुक्ति का इकलौता साधन है।’ अब समय आ गया है कि हम मनुष्य के कल्याण के लिए चेतना संबंधी तकनीकों के साथ काम करें।

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