आधुनिक तकनीक से बुवाई कर खुलेंगे तरक्की के द्वार
बिलासपुर. जिले के ग्राम मुरकुटा के किसानों के लिए अब तरक्की के द्वार खुल गए हैं। उन्होंने खेती-किसानी में आधुनिक तकनीक से बुवाई करना शुरू कर दिया है। वहीं आधुनिक तकनीक से न केवल परिश्रम की बचत हो रही है अपितु मुनाफा भी दोगुना हो गया है। ग्राम के किसान अमित गोंड़, धनुष गोंड एवं शत्रुघन गोंड अपनी 50 डिसमील कृषि भूमि में पैडी सीड ड्रम से धान बुवाई कर रहे हैं। उनका कहना है कि कृषि विभाग द्वारा किसानों की हर संभव मदद की जा रही है। किसानों को नई-नई तकनीकों से अवगत कराया जा रहा है ताकि खेती-किसानी मुनाफे का व्यवसाय बन जाए एवं किसानों का चहुमुंखी विकास हो सके। इस तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि पैडी ड्रम में 4 किलो बीज भरा जा सकता है। दो लाईनों के बीच की दूरी 20 से.मी होनी चाहिए। एक बार में 8 लाईनों में धान बीज की बुवाई होगी।
50 डिसमिल के रकबे में बुवाई करने में 40 मिनट का समय लगेगा। इतने रकबे में 8 किलो बीज लगेगा। अपने अनुभव के आधार पर अमित बताते हैं कि इस तकनीक में कुछ बातों का ध्यान भी रखना होगा जिससे मेरे जैसे ही अन्य किसानों को भी इसका लाभ मिल सके। एक ड्रम में 4 किलो बीज भरा जा सकता है लेकिन बीज की पूरी भराई नहीं करना है ताकि ड्रम का वजन ज्यादा न हो और वह आसानी से खींचा जा सके। साथ ही ड्रम के अंदर घूमने के लिए जगह मिल पाए ताकि बीज छेद से आसानी से गिर सके। धान को अंकुरण के लिए 24 घ्ंाटा ही भीगाना चाहिए ताकि अंकुरण ज्यादा बड़ा न हो और बीज छेद से आराम से गिर सके। उन्होंने बताया कि पडलिंग कार्य एक दिन पहले करना चाहिए। ड्रम चलाने के पहले अतिरिक्त पानी निकाल लेना चाहिए। बहुत डीप पडलिंग करने से ड्रम को खींचने में ज्यादा ताकत लगेगी जिससे कार्यक्षमता घट सकती है। अमित कहते हैं कि इन सावधानियों के साथ बुवाई करने से निश्चित तौर पर बेहतर परिणाम आएंगे। अन्य किसान भाईयों से भी इस तकनीक के इस्तेमाल पर जोर देने की अपील अमित ने की। वे सरकार द्वारा किसानों के हित में किए जा रहे कार्याे की सराहना करते भी नहीं थकते हैं। वे कहते हैं कि सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों का ही परिणाम है कि आज प्रदेश में किसानों की स्थिति बेहतर है। आर्थिक मंदी के दौर में भी सरकार किसानों के साथ खड़ी है।