इस बीमारी के चलते 96 किलो की हो गई थी ये Law स्‍टूडेंट, डायट में सिर्फ 2 चीजें शामिल कर घटाया 35 Kg वजन

कानून की पढ़ाई कर रही 21 वर्षीय की सुरभि भारद्वाज को ल्यूपस (lupus एक तरह की बीमारी) के बारे में मालूम चला था। यह एक ऐसी बीमारी है जो शरीर के विभिन्न अंगों को आंशिक और व्यापक रूप से प्रभवित करती है। इस बीमारी में शरीर का संक्रमित अंग बाकी दूसरे हिस्से के लिए भी बहुत खतरनाक साबित हो जाता है। इसके चलते शरीर में जलन और सूजन होने लगती है। यह बीमारी पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक होती है। इस बीमारी के दुष्प्रभाव में आने से वजन भी बढ़ता है। सुरभि भी मोटापे की वजह से कई तरह की परेशानियां का शिकार हुईं और वह एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गईं,जहां खुद को काफी कमजोर समझती थीं या कहें कि उनका कॉन्फिडेंस लेवल काफी नीचे जा चुका था।

सुरभि को जल्द ही यह महसूस होने लगा था कि अब उन्हें हेल्दी डाइट को लेना शूरू कर देना चाहिए और इसी में उनकी सेहत ठीक रहेगी। इसके बाद सुरभि ने योग और आयुर्वेद के कई सरल सिद्धांतों को फॉलो किया और आत्म-जागरूक (self-aware) हो गईं। सुरभि अब तमाम उन लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं जो शरीर की समस्याओं के चलते परेशान रहते हैं और साहस खो बैठते हैं। यहां हम आपको सुरभि के साहस और संघर्ष के बारे में बता रहे हैं।

  • नाम: सुरभि भारद्वाज
  • पेशा: एलएलबी, फोर्थ ईयर
  • आयु: 21
  • हाइट: 5 फीट 7 इंच
  • शहर: अजमेर
  • अधिकतम वजन दर्ज: 96.5 किलो
  • वजन कम किया: 35 किलो
  • वजन कम करने में लगा 7-8 महीने का समय

वेटलॉस का टर्निंग प्वाइंट

जनवरी 2020 के महीने में मुझे भयंकर बीमारी के बारे में मालूम चला था, जिससे मैं बेहद डरी हुई महसूस कर रही थी। इन दिनों मेरा ल्यूपस बहुत खराब अवस्था में पहुंच गया था और मैं गंभीर रूप से इससे पीड़ित थी। हैवी डोज की दवाइयां लेने के चक्कर में मेरा वजन काफी बढ़ गया था और भूख लगनी बंद हो गई थी। यही वो समय था जब मैंने वास्तव में वजन घटाने की ओर अपना ध्यान केंद्रित करना शुरू किया। उस दौरान मैं अपने लुक्स को देखकर भी हैरान थी। जब मेरा वजन 96 किलो हुआ तो मैंने अपनी पिक्चर्स भी क्लिक करनी बंद कर दी थीं और फिट रहने का निर्णय ले लिया था।

डाइट

मैं नियमित रूप से कम से कम 14:10 से 15: 9 यानी करीब 2 से 3 बजे के बीच कुछ नहीं खाती हूं। मेरा पहला भोजन सुबह 10 बजे और मेरा आखिरी भोजन सुबह 7 बजे के आसपास होता है। मैं यह भी सुनिश्चित करती हूं कि मेरे पास बहुत-से सीजनल (मौसमी), रीजनल (क्षेत्रीय) और ट्रेडिशनल यानी पारंपरिक फूड आइटम्स हों। मैं भूख की तुलना में थोड़ा कम ही खाती हूं। दिन में जब भी प्यास लगती है तो मैं गरम पानी ही पीती हूं।
  1. ब्रेकफास्ट: जागने के बाद में एक गिलास गर्म पानी के साथ Stewed Apples का सेवन करती हूं।
  2. लंच: मेरे घर में सारे भोजन पारंपरिक रूप से तैयार किए जाते हैं, जो पोषण तत्वों से भरपूर और वजन घटाने के आयुर्वेदिक सिद्धांतों का पालन करते हों। इसलिए, मैं तिल का लड्डू खाकर अपना भोजन शुरू करती हूं और फिर दाल, सूजी और चपाती का पौष्टिक भोजन सर्व करती हूं। मैं हमेशा तमाम तरह के मौसमी अनाज जैसे बाजरा और सब्जियों का चुनाव करती हूं।
  3. डिनरः चटनी के साथ रागी डोसा और एक चम्मच घी के साथ मिक्स खिचड़ी।
  4. प्री वर्कआउट मील: मैं खाली पेट वर्कआउट करना पसंद करती हूं, आमतौर पर सुबह जल्दी उठती हूं।
  5. पोस्ट वर्कआउट मील: मैं सुबह 10 बजे के आसपास 6 बादाम और अंजीर का सेवन करती हूं और इसके बाद मैंने एप्पल का हल्का आहार लेती हूं।

इस डेली रूटीन को अपनाकर सुरभि ने मैदा, पनीर जैसी सभी चीजों को किनारे किया। अब वे पिज्जा, पास्ता या बर्गर जैसे फूड आइटम्स से दूरियां बनाए रखती हैं। कभी-कभार यदि उनका ऐसा कुछ खाने का मन भी किया तो वे दाल का हलवा या गोभी का परांठा खाना पसंद करती हैं।

वर्कआउट

आमतौर पर मैं प्राणायाम के साथ पावर योगा और डीप स्ट्रेच करती हूं।
फिटनेस सीक्रेट

  1. वजन कम करने के लिए आपको कैलोरी काउंट करनी की जरूरत नहीं है क्योंकि आपका शरीर सारी कैलोरी को काउंट करता है।
  2. आपको अपना वजन कम करने के लिए खुद को भूखा रखने या सप्लीमेंट खरीदने की जरूरत नहीं है।
  3. फिट बनने के लिए आपको दूसरों से नहीं बल्कि खुद से उत्तर तलाशने होंगे। खाने से पहले अगर ध्यान देंगे तो खुद-ब-खुद आपको पता चल जाएगा कि क्या आपके लिए बेहतर और क्या नहीं। आपका शरीर खुद आपको खुद एक संकेत देता है।
  4. स्वास्थ्य को कमजोर करने की कीमत पर वजन कम करना ठीक नहीं है, इसलिए सेहत का ध्यान रखें।
  5. वजन घटाने के लिए ऑनलाइन जूस फास्ट और डिटॉक्स एक निश्चित शॉर्टकट है, लेकिन आपके चयापचय (metabolism) सिस्टम को खराब कर देता है जिससे शरीर में समस्याएं पैदा होती हैं।
  6. वजन कम करने में यदि आप सलाद और सूप का सहारा लेते हैं तो ये हर किसी के लिए बेहतर साबित नहीं हो सकते हैं। इस तरीके से अनियंत्रित और दिमागी रूप से कमजोर बनते हैं क्योंकि इनमें शरीर को पर्याप्त पोषक तत्वों नहीं मिलते हैं, लिहाजा शरीर से विषाक्त पदार्थों का उत्पादन भी हो सकता है।

वेटलॉस के बाद बदलाव

मैंने जो पहला बदलाव किया, वह था किसी टीवी शो, फिल्म या किसी से बात करते वक्त भोजन करना बंद कर देना।अब मैं धीरे-धीरे खाती हूं और एक निवाले को ठीक से चबाती हूं। जबसे मैंने धीरे-धीरे पूरे स्वाद के साथ आहार का सेवन करना शुरू किया, तब से मैं सामान्य डाइट से कम खाना खाती हूं। अब मैंने न सिर्फ खाने का टाइमटेबल तय किया है बल्कि फूड आइट्मस भी तय हैं। हेल्दी आहार की वजह से नकारात्मकता से भी दूर रहती हूं।

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