कोल इंडिया में विदेशी निवेश श्रमिको के हित अन्य बातों को ध्यान में रख रद्द करें : इंटक कांग्रेस

बिलासपुर.विदेशी निवेश से वन अधिकार कानून 2006 के प्रावधानों की होगी अवहेलना जंगल के संसाधनों पर स्थानीय समुदायों अधिकार आदिवासीयो के जीवनयापन पर्यावरण पर गंभीर समस्या उत्पन्न होगी – इंटक कांग्रेस छःगछत्तीसगढ़ – राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (INTUC) प्रदेशाध्यक्ष दीपक दुबे ने प्रेस को विज्ञप्ति जारी कर बताया कि कोयला उद्योग में शत् प्रतिशत एफडीआई विदेशी निवेश करने की तैयारी केंद्र सरकार की ओर से किए जाने के विरोध में इंटक कांग्रेस द्वारा इंटक राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्वमंत्री सांसद श्री चंद्रशेखर दुबे के निर्देश पर देश भर में एफडीआई के विरोध हो रहा आज 11 बजे से कोल इंडिया बिलासपुर मुख्यालय में छत्तीसगढ़ इंटक कांग्रेस धरना प्रदर्शन कर कर एफडीआई को रद्द करने की मांग एसईसीएल मुख्यमहाप्रबंधक के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति,महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री महोदय, चेयरमैन कोल इंडिया ने नाम ज्ञापन सौपा  गया इंटक कांग्रेस अध्यक्ष दीपक दुबे ने  धरना को संबोधित करते हुवे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी कंपनियों को खुश करने के लिए यह कदम उठाया है इससे उद्योग बर्बाद हो जाएगा मजदूर सड़क पर आ जाएंगे सरकार के फैसले का असर अफसर और मजदूर दोनों पर पड़ेगा मोदी सरकार ने कोयले के खनन और इससे जुड़ी गतिविधियों में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दी है इसके चलते हाल में कोल इंडिया के शेयर फिर तेजी से गिरे अभी तक केवल पावर प्रोजेक्टों के लिए कैप्टिव माइनिंग में एडीआई की अनुमति थी विदेशी निवेशक अपनी पूंजी कोयला उद्योग में लगाएंगे श्रम सस्ता होने से उनका कोयला बाजार में कोल इंडिया के कोयले की तुलना में सस्ता होगा उनके कोयले की मांग बढ़ेगी कोल इंडिया को कोयला बेचने के लिए संर्घष करना होगा कंपनी से मंहगे दर पर कोई कोयला नहीं खरीदेगा इसका सीधा असर कोल इंडिया पर पड़ेगा कंपनी पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा मजदूरों की छंटनी होगी धीरे-धीरे कोयला उद्योग निजी हाथों में चला जाएगा पहले यह अनुमति कोयला खनन विशेष प्रावधान अधिनियम, 2015 और खनन व खनिज संवर्धन एवं नियमन अधिनियम, 1957 के प्रावधानों के तहत सिर्फ उन खदानों के लिए थी जिनके कोयले का इस्तेमाल इसे निकालने वाली कंपनी ही कर रही थी बिजली, स्टील और सीमेंट कंपनियां इसका लाभ ले रही थीं  कोयला वाॅशरीज में 100 फीसदी विदेशी निवेश की अनुमति थी लेकिन ये कंपनियां सिर्फ उन्हीं कंपनियों को तैयार कोयला बेच सकती थीं जिन्होंने प्रसंस्करण के लिए कोयले की आपूर्ति की हो खुले बाजार में इन्हें बेचने की अनुमति नहीं थी लेकिन अब नई नीति के तहत विदेशी कंपनियों को खुले बाजार में कोयला बेचने के काम में भी 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति मिल गई कोयला के वाणिज्यिक इस्तेमाल वाली गतिविधियों में भी निवेश के लिए यह अनुमति मिल गई है विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति के फैसला से देश 1971 से पहले की स्थिति में पहुंच जाएगा। कोयला क्षेत्र का राष्ट्रीयकरण 1971 में हुआ था। उस समय कोयला खनन का काम बेहद अवैज्ञानिक तरीके से किया जाता था जो मानव जीवन के साथ पारिस्थितिकी को भी नुकसान पहुंचता होता था प्राकृतिक संसाधनों के सतत विकास के दृष्टिकोण से देखा जाए तो सौ प्रतिशत विदेशी निवेश से अंधाधुंध खनन होगी जिससे पर्यावरण असंतुलन का खतरा बढ़ेगा विदेशी निवेश से राज्य सरकारो द्वारा वन अधिकार कानून, 2006 के प्रावधानों की अवहेलना की जाएगी यह कानून जंगल के संसाधनों पर स्थानीय समुदायों का अधिकार सुनिश्चित करता है इससे आदिवासी समाज के जीवनयापन पर काफी नकारात्मक असर पड़ेगा विदेशी खनन कंपनी नियमो को दरकिनार कर पर्यावरणीय नियमों  की धज्जी उड़ाते हुवे अंधाधुंध खनन करेगी लूट सको लूट लो कि नीति पर चलेगीमोदी सरकार की विदेशी निवेश के चाह में जमीनी स्तर के लोगों के अधिकारों की अनदेखी कर उनका जीना दुस्वार करने की तैयारी कर रहा है देश को पुनः गुलामी के ओर ले जाने की तैयारी कर रहा है जिसको तत्काल रद्द करने की कष्ट के हम जान दे देंगे पर कोल इंडिया में विदेशी निवेश लागू नही होने देंगे धरना में इंटक कांग्रेस प्रदेशमहामंत्री रजनीश सेठ युवा प्रदेशाध्यक्ष संतोष सोनवानी असंगठित प्रदेशाध्यक्ष संजू तिवारी महिला कांग्रेस सचिव  द्वय चित्र लेखा कांसकार,आशा पांडेय इंटक कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रदीप पांडेय जिलामंत्री इकबाल सिंह सलूजा युवा जिलाध्यक्ष असद खान असंगठित जिलाध्यक्ष नरोत्तम बघेल युवा इंटक प्रदेश सचिव जीनत खान, महिला जिलाध्यक्ष नीरा साहू  शालिनी खरे बिल्हा ब्लाक अध्यक्ष युवा सचिव सुनील सिंह राजपूत प्रवीण ठाकुर गायत्री सागर महिला इंटक उपाध्यक्ष रजनी साहू मंजू साहू तृप्ति चंद्रा सुशीला खनूजा शेख तहरिमा अनिल निर्मलकर कन्हैया प्रेमी विक्की कुमार गणेश सोनवनि आदित्य त्रिपाठी सहित भारी संख्या में इंटक कांग्रेस कार्यकर्ता एसईसीएल श्रमिक साथी उपस्थित थे।

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