जब CJI ने नाराज होकर कहा- क्या हम मेरे रिटायरमेंट के दिन तक सुनवाई करेंगे?

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या केस (Ayodhya Case) की 32वें दिन की सुनवाई शुरू होते ही गुरुवार को एक वकील ने कहा कि हमारा और निर्मोही अखाड़ा में आपस में ज़मीन के अधिकार को लेकर झगड़ा है, हमको भी सुना जाए. मुख्य न्यायाधीश ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हम क्या रोज़-रोज़ इसकी सुनवाई करते रहेंगे? क्या हम मेरे रिटायरमेंट के आखिरी दिन तक इसकी सुनवाई करेंगे. आज सुनवाई का 32 वां दिन है और आप अब कह रहे हैं कि आपको भी सुना जाए. मुख्य न्यायाधीश ने सुनने से इनकार कर दिया. उल्लेखनीय है कि चीफ जस्टिस 17 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं.
इससे पहले CJI ने सभी पक्षकारों से कहा कि इस बात का ध्यान रखना होगा कि 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी हो जानी चाहिए. मुस्लिम पक्ष की तरफ से मीनाक्षी अरोड़ा के बाद शेखर नाफड़े को भी बहस करना है. उसके बाद हिंदू पक्ष को जवाब भी देना है.
CJI ने दोनों पक्षकारों से पूछा कि बताइए कि आप लोग कैसे अपनी जिरह पूरी करेंगे. सभी पक्षों से निर्धारित समय तक दलील देने का समय उन्होंने मौखिक तौर पर स्पष्ट किया.
ASI की रिपोर्ट पर बहस
आज भी मुस्लिम पक्ष की ओर से सीनियर एडवोकेट मीनाक्षी अरोड़ा ने दलीलें रखीं. मीनाक्षी अरोड़ा ASI की खुदाई की रिपोर्ट पर मुस्लिम पक्ष का रुख साफ कर रही हैं. कल उन्होंने अपनी दलीलों में ASI रिपोर्ट की प्रमाणिकता पर सवाल खड़े किए थे. आज मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि विवादित ढांचे के नीचे एक ईदगाह हो सकता है. वहां ASI की खुदाई मे मिले दीवारों के अवशेष ईदगाह के हो सकते है.
जस्टिस अशोक भूषण ने इस पर टोकते हुए कहा कि मुस्लिम पक्ष का तो ये मानना रहा है कि मस्जिद खाली जगह पर बनाई गई. लेकिन अब आप कह रही हैं कि उसके नीचे ईदगाह था? अगर ऐसा था तो आपकी याचिका में ये शामिल क्यों नही था? मीनाक्षी अरोड़ा ने जवाब दिया कि 1961 में जब हमने केस दायर किया तब ये मुद्दा ही नहीं था. ये बात तो 1989 में सामने आई जब हिन्दू पक्ष ने मुकदमा दायर कर दावा किया कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी. मेरी इस वक्त की जिरह रिपोर्ट पर आधारित है. मेरे कहने का मतलब है कि जब ये कहा जा रहा है कि दीवारें मंदिर की हो सकती हैं तो ये भी अनुमान लगाया जा सकता है कि ये दीवारें ईदगाह की हैं.
मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि कि ASI ने खुद स्वीकार किया था कि उसको लेयर को स्ट्रैटेग्राफ़िक पहचान करने में दिक्कत हुई थी, कुल 184 हड्डियां मिली थी लेकिन HC ने सिर्फ 21.2% का ही अध्ययन किया गया, और उन्होंने 9 कल्चर के आधार पर 9 समयकाल के बारे में बताया. ASI ने जिन सभ्यताओं के बारे में बताया है उनका मन्दिर से कोई लेना देना नहीं है. ASI ने अपनी रिपोर्ट में शुंग, कुशन और गुप्ता समयकाल के बारे में बताया है. कार्बन डेटिंग का इस्तेमाल यह पता करने के लिए किया जाता है कि कोई चीज़ कितनी पुरानी है लेकिन ASI हड्डियों का इस्तेमाल नहीं करता इस लिए इनकी कार्बन डेटिंग नही की गई.
मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि गुप्त वंश का समयकाल 4-6AD रहा है, और इसका गुप्त वंश से कोई लेना देना नहीं है. मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि ASI ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि वहां पर हर जगह अवशेष थे और बाबरी मस्जिद के बारे में कुछ नहीं बताया लेकिन उन्होंने राम चबूतरे के स्थान को राम चबूतरा बताया है. उन्होंने कहा कि जिस बड़े स्ट्रक्चर की बात हो रही है. वह 12वीं सदी में बनाया गया था. उसका गुप्त समयकाल से कोई मतलब नहीं है. अरोड़ा ने कहा कि वहां पर ईदगाह भी हो सकती है. सब जानते हैं कि ईदगाह का मुख पश्चिम की तरफ होता है, तो यह क्यों कहा जा रहा है कि वहां मंदिर ही था. जस्टिस भूषण ने कहा कि आपने कहा कि बाबरी मस्जिद सपाट मैदान पर बनाई गई. अब आप कह रही हैं कि वहां पर एक इस्लामिक स्ट्रक्चर भी था.
मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि फ्लोर 2-3 और 4 पर ASI की रिपोर्ट में कुछ स्तम्भ मिलने की बात कही गई है. यह सभी फ्लोर अलग-अलग समयकाल के हैं तो कैसे ASI कह सकती है कि वहां पर बहुत बड़ा कोई स्ट्रक्चर रहा होगा. मीनाक्षी अरोड़ा ने ASI की रिपोर्ट में जमीन के फ्लोर के बारे में अनियमितता बताते हुए कहा कि फ्लोर नीचे जाते हैं और उसके ऊपर नए फ्लोर बनते जाते हैं. हम किसी मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग की बात नहीं कर रहे हैं. जस्टिस बोबडे ने कहा कि 50 मीटर की दीवार कैसे बिना किसी स्तंभ के खड़ी रह सकती है. जज ने पूछा कि आप बताइए कि ASI रिपोर्ट में कहां लिखा है कि जो स्तंभ मिले हैं वह अलग-अलग समयकाल के हैं.
मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि यह कल्पना नहीं की जा सकती कि दीवार एक विशाल ढांचे से उत्पन्न हुई जो अलग-अलग समयकाल से अलग-अलग लेयर के स्तंभों पर टिकी हुई थी, जब भी कोई लेयर (समयकाल) बनाता है तो वह नीचे चला जाता है जिसमें कई जनरेशन शामिल होती हैं और उसके ऊपर फिर कोई नया समयकाल आ जाता है. ऐसे में यह कैसे संभव है कि अलग अलग समयकाल के स्तंभों पर कोई दीवार टिकी हो. सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि कई स्तंभों के बीच की दूरी 2 मीटर के आस-पास क्यों थी?