समय रहते कैंसर पहचानकर रोगी के जीवनकाल को बढाया जा सकता है : डॉ पुष्कल द्विवेदी


बिलासपुर.अंतर्राष्ट्रीय कैंसर दिवस के अवसर पर जिला चिकित्सालय बिलासपुर में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया । आरोग्य अस्पताल बिलासपुर के डॉ पुष्कल द्विवेदी (एमडी ईसीएमओ एमआरसीपी मेडिकल ऑंकोलॉजिस्ट) द्वारा कैंसर विषय पर जीएनएम की छात्राओं और शहरी एएनएम एवं मितानिनो ने भाग लिया । संगोष्ठी का उद्देश्य जन जागरूकता के साथ-साथ किसी क्षेत्र में काम करने वाले सहयोगी हो को भी कैंसर की पहचान आसानी से कराई जा सके । डॉ पुष्कल द्विवेदी ने बताया कैन्सर, रोगों का एक वर्ग है जिसमें काशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि के साथ ही शरीर के दूसरे अंगों में भी फैलने और विनाश करने की क्षमता है। ज़्यादातर कैन्सर का कारण प्रदूषित वातावरण होता है। कुछ आनुवंशिकी भी होते हैं। ज्यादातार कैन्सर प्रारम्भिक अवस्था में लक्षण या स्क्रीनिंग द्वारा पहचान लिया जा सकता है। चिकित्सीय परीक्षण, रक्त जाँच, एक्स-रे, सी.टी. स्कैन, एण्डोस्कोपी तथा बायोप्सी द्वारा पहचान सकते हैं। कुछ कैन्सर को तम्बाकू चबाना, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, मदिरापान, यौन सम्बन्धित रोगों आदि से बचाव करके कम किया जा सकता है। एक ट्यूमर कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि जिससे एक परावर्तित (ट्रांसफॉर्मड) कोशिकाओं का समूह बन जाता है। जिसे गांठ कहा जाता है। इसके बनने के प्रमुख कारण कोशिका विभाजन को नियंत्रित करने वाली प्रक्रिया उसके अन्दर उपस्थित आनुवंशिकता के किन्हीं लक्षणों के प्रति जीनी उत्परिवर्तन है। ट्यूमर दो प्रकार के हैं- सुयम अर्बुद जिसे बिनाइन कहते है  जो परिसम्पुटित (इनकेप्स्लेटेड) हैं यह एक ही स्थान तक सीमित रहते हैं। दुर्दम अर्बुद मैलिगनेन्ट कहलाते हैं । जिनमें कोशिकायें परिसम्पुटित न होने के कारण रक्त परिवहन के कारण शरीर के दूसरे भागों में जाकर जगह बना लेते है । कैंसर शरीर के किसी भाग के ऊतक में उत्पन्न हो सकता है। ऊतकों की प्रकृति के आधार पर इनका वर्गीकरण किया जाता है । कैन्सर के प्रारम्भिक लक्षण चिकित्सा विज्ञानियों के अनुसार शरीर में उत्पन्न असामान्यता जो छः सप्ताह से ज्यादा समय की हो, इस दौरान उसमें कमी दिखाई ना दे उसकी तुरंत जाँच करवाना जरूरी  है। कैन्सर की जाँच व उपचार जितना ही जल्दी शुरू हो परिणाम उतने ही अच्छे होने की संभावना बढ जाती है। उन्होंने कहा गांठ या उभार शरीर में अचानक ही दिखाई दे। बिना कारण या बिना विकृति के सिर में दर्द होना। जख्म विशेष रूप से ऐसा जिसके किनारे उठे हों तथा बाहर की ओर उल्टे हों जिससे जख्म का रूप गोभी के फल जैसा दिखता हो। बिना किसी विकृति के शरीर से रक्तस्राव या तरल पदार्थ का निकलना। त्वचा में परिवर्तन का दिखाई देना।खांसी आना तथा गले की आवाज का कर्कश हो जाना मल के स्वरूप व प्रकृति में परिवर्तन जैसे गोल-गोल पिण्डों के रूप में या उसका रंग सामान्य से लाल कालापन लिये होना। बिना कारण के अचानक वजन का कम होने लगना । मुँह का कैन्सर,स्तन का कैन्सर,फेफड़ों का कैन्सर, सर्वाइकल कैन्सर, प्रोस्टेट का कैन्सर, अण्डाशयी कैन्सर को समय रहते पहचान कर रोगी के जीवनकाल को बढाया जा सकता है । कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ प्रमोद कुमार महाजन प्रभारी सिविल सर्जन डॉ मनोज जयसवाल के साथ एनसीडी प्रकोष्ठ के समस्त अधिकारी और कर्मचारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे कार्यक्रम का आभार जिला नोडल अधिकारी गैर संचारी रोग प्रकोष्ठ बिलासपुर के डॉ. बी के वैष्णव और संचालन जिला सलाहकार डॉ. अनुपम नाहाक ने किया।

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