September 18, 2020
सरकारी धन का न्यास भंग कर दुरूपयोग करने वाली ऑडिटर पहुँची जेल

भोपाल. जिले के न्यायालय प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश श्री राकेश शर्मा के न्यायालय में आरोपिया अनिता बाथम रैयकवार द्वारा अग्रिम जमानत आवेदन प्रस्तुत किया और कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है, शासन की ओर से पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक अमित राय ने बताया कि आरोपिया अनिता बाथम रैयकवार ने कार्यालय आयुक्त अनुसूचित जाति विकास विभाग में कूटरचना कर रूपये 80,00,000 का आहरण कर आर्थिक अनियमितता एवं आपराधिक न्यास भंग किया । प्रकरण अत्यंत गंभीर प्रकृति का है, यदि आरोपिया को अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाता है तो वह साक्ष्य एवं साक्षियों को प्रभावित कर सकती है। प्रकरण विवेचनाधीन है। केस डायरी का अवलोकन एवं अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए माननीय न्यायालय द्वारा आरोपिया अनिता बाथम रैयकवार की जमानत निरस्त कर उसे जेल भेज दिया गया।
एडीपीओ अमित राय ने बताया कि भारत सरकार विशेष केन्द्रीय सहायता योजना अंतर्गत अनुसूचित जाति के आर्थिक रूप से कमजोर, बेरोजगार युवक/युवतियों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिये रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं अन्त्योदय स्वरोजगार योजना अंतर्गत अनुदान उपलब्ध कराने के लिये प्रतिवर्ष राशि प्राप्त होती है, जिसका आहरण कर अन्त्योदय स्वरोजगार योजना राशि म.प्र. अनु. जाति वित एवं विकास निगम को उपलब्ध कराई जाती है। अनु. जाति विकास म.प्र. तथा कोषालय वल्लभ भवन के कर्मचारी तथा अधिकारीगणों ने धोखाधडी एवं षड्यंऋ पूर्वक दस्तावेजों की कूटरचना करते हुए, 7 करोड रूपये की वित्तीय आहरण किया।
आरोपिया वर्ष 1987 से ऑडिटर के पद पर भर्ती हुई थी। जनवरी 2006 को लेखा अधिकारी के पद पर पदोन्नत हुई , दिनांक 18.01.2010 से 08.04.2010 तक आहरण संवितरण अधिकारी के रूप में कार्यरत रही। आरोपिया ने वर्ष 2009, 2010 में कार्यालय आयुक्त जाति विकास विभाग अंतर्गत विभागीय बजट में मांग संख्या 64 योजना क्रमांक 0538 शिक्षित युवकों को स्वरोजगार प्रशिक्षण योगदान योजना अंतर्गत बिल क्रमांक 351/ 16.12.2009 से राशि रूपये 80,00,000 की रकम आहरित कर पुन: बिल क्रमांक 493/26.03.2010 से बिना स्वीकृति के कूटरचित बिल का ट्रेजरी से दिनांक 31.03.2010 को आहरण किया । इस अवधि में केशियर का कार्य आरोपी गोविंद जेठानी एवं डीडीओ. का कार्य आरोपी श्रीमती अनिता बाथम रैयकवार ने किया एवं अनियमित वितरण तथा रूपये 1,59,38,585 की राशियों का दो बार आहरण करते हुए अपने पद का दुरूपयोग कर अवैध लाभ प्राप्त करने हेतु शासकीय राशि का अपराधिक न्यास भंग किया ।
पुलिस द्वारा उक्त अपराध अपराध क्रमांक 61/2012 धारा 420, 467, 471, 120 बी भादवि एवं 13(1) सहपठित 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत पंजीबद्ध कर 173(8) दण्ड प्रकिया संहिता के अंतर्गत विवेचना में लिया ।