हिंदी स्पर्धाओं का आयोजन जोनल रेल कार्यालय में संपन्न

बिलासपुुर. राजभाषा विभाग,जोनल कार्यालय की ओर से निर्माण सभाकक्ष में मुख्य तीन प्रतियोगिताएं यथा हिंदी टिप्पण व प्रारूप लेखन, निबंध एवं वाक़ (भाषण) प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया है। यह दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के विभिन्न स्टेशनों एवं कार्यालयों में राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए किये जा रहे विशेष उपक्रमों में से एक है. यह प्रतियोगिता में मंडलों ,कारखानों एवं मुख्यालय स्तर पर चयनित कुल 54 प्रतिभागियों के लिए था. प्रत्येक प्रतियोगिता में से रेलवे बोर्ड स्तर के चुनकर भेजने की यह कड़ी बेहद रोचक प्रतियोगिता थी . जहां प्रारूप लेखन में कार्यालयीन प्रश्नोत्तर को शामिल किया गया वहीं निबंध प्रतियोगिता के लिए ‘(1) ‘‘भाषा,समाज एवं संस्कृति पर इलेक््रटॉनिक साधनों का प्रभाव‘‘ ,(2) ‘‘भारत की प्रगति में रेल की भूमिका‘‘ रखा गया था जिस पर प्रतिभागीगण अपनी पसंद के विषय पर निबंध लिखे. ये प्रतियोगिताएं प्रथम पाली में आयोजित की गई। द्वितीय पाली में ‘‘हिंदी वाक़ प्रतियोगिता‘‘का आयोजन हुआ जिसमें विचार रखने के लिए दो विषय यथा (1) ‘‘भारतीय रेल का कायाकल्प‘‘ एवं (2) ‘‘हिंदी फिल्में एवं भारतीय रेल ‘‘ रखा गया था. यह कार्यक्रम मुख्य राजभाषा अधिकारी एवं मुख्य सामग्री प्रबंधक (एमएंडएस), मुख्यालय श्री शशिप्रकाश द्विवेदी की अध्यक्षता में हुई. कार्यक्रम में बिलासपुर नगर से निर्णायक सदस्य की हैसियत से वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्राचार्य,नवागढ़ डॉ. सुनीता मिश्रा को सादर आमंत्रित किया गया था तथा द्वितीय निर्णायक सदस्य के रूप में शहर के वरिष्ठ व्यंग्यकार श्री राजेन्द्र मौर्य उपस्थित हुए. इस अवसर पर पूर्व वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी पी.एन. शर्मा की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य राजभाषा अधिकारी ने बताया कि समय-समय पर आयोजित की जा रही इस प्रकार की प्रतियोगिताएं न केवल यहीं तक सीमित है बल्कि आगे जाने के लिए भी अच्छा माध्यम है, जहां बोर्ड स्तर पर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) की ओर से प्रतिनिधित्व हो सके. इन प्रतियोगिताओं के पीछे हमारा मुख्य उद्देश्य इस रेलवे पर हिंदी में शतप्रतिशत कार्य करने के लिए प्रेरित करना है, अतः राजभाषा नियम अनुसार ‘‘क‘‘ क्षे़त्र में होने के कारण हमारी जिम्मेदारी इस रेलवे के लिए और अधिक है.। कार्यक्रम में समीक्षात्क टिप्पणी करते हुए निर्णायक सदस्य डॉ. सुनीता मिश्रा जी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रतिभागियों को अपने विचार रखने के लिए चुने गये विषय प्रासंगिक थे,सभी ने अपनी शैली में तथ्यों को समाहित करते हुए अपनी बातें रखीं. रेलवे की बात न केवल रेलकर्मी बल्कि हर भारतीय नागरिक के लिए एक सुखद अनुभव होता है.रेलवे से यात्रा का आनंद और रेल से जुड़ी बातें हमारी जिंदगी का हिस्सा होता है. बचपन से खिड़की के पास बैठककर यात्रा करना कोई कैसे भूल सकता है .आज की जिंदगी को रेल से जोड़कर जीवन के एक नये फलसफे को अपनी कविता में सहेजते हुए उसे प्रस्तुत किया :- जिंदगी का सफर भी रेल की तरह खुबसरूत है , आये और कुछ देर रहे फिर चले गये।
सामान भी कम रखें तो और खूबसूरत बन जाए , कुछ सहेजा कुछ बांटा फिर चले गये.
संबंध भी बनाया सफर में इस तरह कुछ सुने, कुछ सुनाये फिर चले गये.
जिंदगी कफलसफा भी रेल की तरह है , न रूके कभी न थके कभी बस चलते चले गये, चलते चले गये।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए जोनल कार्यालय में मुख्य नियंत्रक (कोचिंग) के पद पर कार्यरत, कथाकार एवं समीक्षक श्री खुर्शीद हयात ने हिंदी को ‘मीरा की सहेली और अपनी आत्मा की थिरकन‘ ‘‘ निरूपित करते हुए कहा कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के राजभाषा विभाग के वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी श्री विक्रम सिंह जी का कार्य प्रशंसनीय है क्योंकि इन्होंने कई आयोजनों को एक नई जमीं और एक नया आसमान दिया है.