ज़िला कांग्रेस कमेटी और जिला एनएसयूआई द्वारा JEE और NEET परीक्षा के विरोध में राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
बिलासपुर. ज़िला कांग्रेस कमेटी ( ग्रामीण / शहर ) और जिला एनएसयूआई ने संयुक्त रूप से 28 अगस्त को नेहरू चौक में केंद्र सरकार द्वारा JEE और NEET परीक्षा सितम्बर में आयोजित करने के निर्णय के विरोध में एक दिवसीय धरना -प्रदर्शन कर महामहिम राष्ट्रपति महोदय के नाम सिटी मजिस्ट्रेट पुजारा को ज्ञापन सौंपा।
इस अवसर पर जिला अध्यक्ष विजय केशरवानी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र अपने मन की बात जनता को सुना रहे है पर छात्र और अभिभावकों की बात नही सुन रहे है । कोविड 19 महामारी में समूचा देश अपनी आत्मसुरक्षा के लिए जूझ रहा है ,लोगो मे एक अनिश्चितता और भय का वातावरण फैला हुआ है , देश आर्थिक संकट से गुजर रहा है,कलाकारखाने बन्द हो रहे है ,लोग बेरोजगार हो गए ,बड़ी बड़ी परीक्षाएं रद्द कर दी गई,छात्रों को जनरल प्रमोशन दे दिए गए ,स्टेट और केंद्र के अनेक एंट्रेंस एग्जाम नही हुए किन्तु ऐसी कौन सी परिस्थिति बन गई है कि केवल JEE और NEET की परीक्षा सितम्बर में ही कराने के लिए केंद्र सरकार बाध्य है ? कोविड 19 के कारण स्वयं केंद्र सरकार ने रेल सेवा बाधित रखा है, होटल, लॉज बन्द पड़े है, वर्तमान स्थिति में भारी वर्षा के कारण जन -जीवन अस्तव्यस्त है ,देश मे लगभग 33 लाख लोग कोविड से संक्रमित है ,60 हजार से अधिक मर चुके है ,इस ओर केंद्र सरकार ध्यान न देकर jee और NEET की परीक्षा आयोजित करने के लिए अड़ी हुई ,गरीब बच्चे जो आर्थिक कारण दूर नही जा सकते उन्हें भी परीक्षा से वंचित करने का केंद्र सरकार की साजिश है,केंद्र सरकार अपनी तानाशाह प्रवृत्ति को छोड़े और छात्रों के जीवन के साथ न खेले ,हम मांग करते है कि केंद्र सरकार सितम्बर में आयोजित परीक्षा की तिथि को कम से कम दो माह आगे बढ़ाए।
शहर अध्यक्ष प्रमोद नायक ने कहा कि नरेंद्र मोदी के ये निर्णय भी अदूरदर्शी है , कभी कहते है नोटबन्दी के लिए 100 दिन , कोविड के लिए 21 दिन चाहिए सब ठीक हो जाएगा ठीक उसी प्रकार सितम्बर माह में JEE और NEET की परीक्षा के निर्णय है ,कोई बच्चा संक्रमित होता है तो उसे परीक्षा से वंचित होना पड़ेगा,या परीक्षा के बाद संक्रमित होता है तो फिर उस सेंटर के सभी बच्चे जो अलग अलग प्रान्तों से होंगे उनके लिए समस्या है ,केंद्र सरकार छात्रों के जीवन से खेल रही है और उन्हें मानसिक प्रताड़ना दे रही है , केंद्र सरकार के इस निर्णय का स्वागत विदेशी शिक्षाविद कर रहे है ,जब राज्य सरकारे PET, PAT, PMT, की परीक्षा नही ली ,उसी प्रकार केंद्र ने भी क्लेट,कैट,आदि परीक्षा नही ली तो फिर JEE और NEET ही क्यों?
JEE और NEET में लगभग 25 लाख छात्र पंजीकृत है,सभी बच्चे आर्थिक रूप से मजबूत नही ,इनका परीक्षा केंद्र अलग अलग प्रान्तों में होता है ,और बड़े शहरों में ही केंद्र होते है फिर साधन विहीन छात्र उस केंद्र तक कैसे पहुंचेगा ,ऐसा लगता है नरेंद्र मोदी को बच्चों के भविष्य से कोई लेना-देना नही है वह अपनी जिद्द बच्चो पर थोपना चाहते है।
नरेंद्र मोदी छात्रों के जीवन और भविष्य दोनों से खेलना चाह रहे है ।
एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष तनमीत छाबड़ा ने कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार देश को बर्बाद करने में लगी हुई है, आर्थिक मंदी,बेरोजगारी,राष्ट्रीय सम्पत्तियों को निजी हाथों बेचना,विदेश नीति में असफल,पड़ोसी आंख तरेर रहा है ,भ्रष्टाचार,कालाधन बढ़ रहे है ,सभी क्षेत्रों में असफलता के बाद ऐसा लगता है कि नरेंद्र मोदी अब छात्र और शिक्षा दोनों को बर्बाद करने में लग गए है ,पहले नई शिक्षा नीति लाये ,जिसमे छात्रों की हित नजर नही आता ,अब JEE और NEET के नाम पर छात्रों को उनके अधिकार से वंचित किया जा रहा है ,वर्तमान स्थिति अनुकूल नही है और न ही परीक्षा के लिए अच्छा वातावरण ही दिख रहा है ,फिर भी सितम्बर में ही परीक्षा के लिए अड़ियल बनना प्रजातन्त्रवादी नीति के खिलाफ है ,परीक्षा को दो माह आगे करने से कोई अंतर नही पड़ने वाला है क्यों अभी स्कूल-कालेज बन्द पड़े है ,वर्चुअल पढ़ाई से कितने प्रतिशत बच्चे पढ़ रहे है? क्योंकि भारत की ग्रामीण जनजीवन में हर बच्चे के हाथ मे स्मार्ट फोन सम्भव नही है ,यदि है भी तो प्रॉपर नेटवर्क हो इसकी भी निश्चतिता नही है ,केंद्र सरकार को चाहिए कि परीक्षा को स्थगित कर भविष्य में आयोजित करे जब वातवरण अनुकूल हो।
धरना में प्रवक्ता ऋषि पांडेय,विधि प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष सन्दीप दुबे,ब्लाक अध्यक्ष विनोद साहू,कार्यालय सचिव सुभाष ठाकुर,एनएसयूआई के प्रदेश सचिव लक्की मिश्रा,अल्ताफ अली,नाजिम खान,सिद्धांत बत्रा,विवेक साहू ,आईटी सेल के अध्यक्ष अनिल शुक्ला,अर्जुन सिंह,अनिल यादव,अजय काले,धनन्जय यादव,आदि उपस्थित थे।