20 जून: आज ही के दिन खोला गया था मुंबई की शान छत्रपति शिवाजी टर्मिनस


नई दिल्ली. मुंबई के इतिहास में आज 20 जून का दिन काफी महत्वपूर्ण है. 1877 में 20 जून के ही दिन मुंबई स्थित विक्टोरिया टर्मिनस (Victoria Terminus) को लोगों के लिए खोल दिया गया था. ये वही विक्टोरिया टर्मिनस है जिसे आज छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (Chhatrapati Shivaji Terminus-CST) के नाम से जाना जाता है. मुंबई की पहचान छत्रपति शिवाजी टर्मिनस देश के व्यस्ततम रेलवे स्टेशनों में शामिल है जहां रोजाना 30 लाख यात्री पहुंचते हैं.

इसकी इमारत में 3 देशों- भारत, ब्रिटेन और इटली की सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई देती है. 2004 में यूनेस्को ने इस ऐतिहासिक इमारत को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया था.

1878 को विक्टोरिया टर्मिनस स्टेशन का निर्माण कार्य शुरू किया गया था, जो 1887 में पूरा हुआ. ये उस समय मुंबई में सबसे ज्यादा समय में तैयार होनी वाली इमारत थी. विक्टोरिया टर्मिनस का डिजाइन ब्रिटिश वास्तुकार एफडब्ल्यू स्टीवंस ने तैयार किया था. यह इमारत 2.85 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है. उस वक्त इसे बनाने में 16,13,863 रुपए (2,60,000 स्टर्लिंग पाउंड) का खर्च आया था. उस समय न सिर्फ ये एशिया की सबसे बड़ी इमारत थी, बल्कि मुंबई की सबसे महंगी इमारत भी थी.

विक्टोरिया टर्मिनस का नाम तत्कालीन ब्रिटिश महरानी विक्टोरिया के नाम पर रखा गया था. इस इमारत को ताजमहल के बाद सबसे ज्यादा तस्वीर खींची जाने वाली देश की दूसरी इमारत का दर्जा भी हासिल है. 90 के दशक में विदेशी नामों को बदलने का आंदोलन चला. जिसमें शिवसेना ने विक्टोरिया टर्मिनस का नाम बदलने को लेकर अभियान चलाया और 1996 में विक्टोरिया टर्मिनस का नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी टर्मिनस कर दिया गया. हालांकि आज भी लोग इसे वीटी ही बुलाते हैं.

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