सरकारी गोदाम में चावल नहीं, फोर्टिफाइड चावल का टेंडर नहीं फिर दो माह का चावल गरीबों को मिलेगा कैसे?
- खाद्य संचालनालय का आदेश गरीबों के साथ भद्दा मजाक, जब गोदाम में चावल नहीं है फिर दो माह का एक साथ देने का आदेश क्यों?
रायपुर. खाद्य संचालनालय के दो माह का चावल एकमुश्त देने के आदेश को गरीबों के साथ भद्दा मजाक करार देते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल से पूछा जब सरकारी गोदाम में चावल नहीं है? फोर्टिफाइड राइस का टेंडर नहीं हुआ है? फिर गरीबों को दो माह का चावल एकमुश्त देने का आदेश क्यों दिया गया? ये आदेश गरीबों के साथ भद्दा मजाक है, अपमान है। क्या खाद्य संचालनालय के अधिकारी बेसुध रहते है? उन्हें अपने विभाग की स्टॉक के बारे में जानकारी नहीं है? बड़ी अराजक स्थिति है? राशन कार्डधारी पहले ही खराब क्वालिटी की सड़ा हुआ चावल राशन दुकानों से मिलने की शिकायत कर रहे है। जिस पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। क्या विभाग, खाद्य मंत्री के बिना जानकारी इस प्रकार से आदेश दिया है? क्या ये आदेश विभागीय मंत्री के अनुमोदन से हुआ है? क्या दो दिन में लाखों टन चावल जिसमें फोर्टिफाइड चावल मिला हो उपलब्ध हो जायेगा?
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा सरकार को कौन चला रहा है, समझ नहीं आता? जिस प्रकार से खाद्य विभाग की कार्यशैली है इस बात का प्रमाण है विभागीय मंत्री के नियंत्रण में कुछ भी नहीं है? खाद्य मंत्री को इसका जवाब देना चाहिए कि खाली गोदाम से गरीबों के घर तक दो माह का चावल कब पहुंचेगा? सरकार के अजीबोगरीब फरमान से खाद्य अधिकारी एवं राशन दुकान संचालक सभी परेशान है। गरीबों को चावल देने के नाम से भाजपा सरकार गुमराह कर रही है। सरकार तत्काल फोर्टिफाइड मिला चावल की व्यवस्था कर, राशन कार्डधारियों को दे।


