भोंदू दास के पास फूटी कौड़ी भी नहीं, परत दर परत आगे बढ़ रही जांच कार्यवाही से दहशत में हैं भू माफिया

बिलासपुर/अनीश गंधर्व. जिस रिक्शा चालक भोंदू दास के नाम सरकारी रिकार्ड में अरबों की जमीन दर्ज थी दर असल उसके पास एक फूटी कौड़ी भी नहीं है। मोपका, लिंगिया डीह, चिल्हाटी में हुए अरबों के जमीन घोटाले की जांच की आंच राजधानी रायपुर तक हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी भाजपा शासन काल में हुए इस जमीन घोटाले की निष्पक्ष जांच चाहते हैं। सरकारी जमीनों को बेचने के लिए रिकार्ड में जमकर हेर फेर किया गया,इस खेल में राजस्व विभाग के अधिकारी मालामाल हो गए। सड़क छाप जमीन दलालों की किस्मत रातों रात चमक गई। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि भोंदू दास जेल में है, मौजूदा हालात में सरकारी रिकार्ड में उसके पास कोई संपत्ति नहीं हैं? राजस्व अधिकारियों ने किस तरह चालाकी से सरकारी जमीनों को बंदर बांट करते हुए दलालों को फायदा पहुंचाया है उसे पुलिस भी जान चुकी हैं।
भोंदू दास के जेल जाते ही कूट रचना करने वाले अधिकारी और जमीन दलालों के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई हैं, उन्हे भय सताने लगा है कि कहीं पुलिस  उसे सरकारी गवाह बना लेगी तो उनका भी जेल जाना तय है। मालूम हो कि भाजपा शासन काल में मोपका, लिंगियाडीह, और चिल्हाटी सरकारी जमीनों में जमकर घोटाला किया गया। तत्कालीन तहसीलदार, पटवारी और एस डी एम की भूमिका संदेहास्पद रही। बताया जा रहा है कि मोपका में कार्यरत रहे एक पटवारी की सम्मति करोड़ों में है। इसी तरह तहसील कार्यालय में भी अधिकारियों ने भी मुंह मांगा दाम लेकर काम किया। क्योंकि इन अधिकारियों ने भी ठान लिया था कि छोटे झाड़ के जंगल और तालाब मद की जमीनों को बेचना है, उन्हे मालूम था कि जन विरोध होने वाला नहीं है।
अब एक दूसरे को रास्ते लगाने का खेल शुरू हो गया हैं। सरकंडा थाने के आस पास जमीन दलाल मंडरा रहे हैं। पुलिस जांच की पल पल खबर ली जा रही है। जिस भोंदू दास को पुलिस ने पकड़ा है उसे रास्ते से हटाने की योजना फैल हो चुकी है। घोटाले से जुड़े राजस्व विभाग के अधिकारी और जमीन दलालों को यह चिंता हो रही है कि भोंदू दास को सरकारी गवाह के रूप में शामिल कर लिया गया तो उनका जेल जाना तय है।

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