सनातन धर्म में गुरुवार को भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की आराधना का दिन माना गया है. भगवान विष्णु (Lord Vishnu) को प्रसन्न करने के लिए उनके प्रिय पौधे केले के पेड़ की पूजा अर्चना की जाती है. साथ ही बृहस्पति देव की आराधना करके उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश की जाती है, जिससे परिवार
ज्योतिष में हर ग्रह का अपना महत्व है. इनका व्यक्ति के जीवन पर काफी प्रभाव पड़ता है. भले ही व्यक्ति को प्रसिद्धि और मान-सम्मान भगवान सूर्य दिलाते हैं लेकिन भोग-विलास और सुख-सुविधा देने वाले ग्रह हैं शुक्र. 22 जनवरी को अपने मित्र शनि की राशि कुंभ में शुक्र गोचर करने जा रहे हैं. इस गोचर
सनातन धर्म में वास्तु शास्त्र को बहुत महत्व दिया गया है,. कहा जाता है कि अगर हम चीजों को घर में सही स्थान पर नही रखते हैं तो नकारात्मक शक्तियां हावी हो जाती हैं और बनते हुए काम बिगड़ने लगते हैं. साथ ही परिवार दरिद्रता की ओर बढ़ने लगता है. वास्तु शास्त्र में घर में
ज्योतिष (Astrology) भविष्य जानने का माध्यम है. इसके कई अलग-अलग चैप्टर में अलग-अलग तरीकों से भविष्य का हाल बताया जाता है. ऐसे में सामुद्रिक शास्त्र के मुताबिक घर से बाहर निकलते समय अगर आप बस ये दो काम कर लें तो सफलता पक्का आपके कदम चूमेगी. वहीं इसके बोनस में आपकी विघ्न-बाधाएं और ग्रह दोष भी दूर भाग
आचार्य चाणक्य को भारत का विद्वान और कुशल कुटनीतिक माना जाता है. उन्होंने मानव जीवन को लेकर बहुत सी बातें अपने नीति शास्त्र में बताई हैं. उनकी बातों को ‘चाणक्य नीति’ नाम के शास्त्र में संकलित किया गया है. उनके बातों का अनुसरण कर कई महान लोगों ने जीवन में सफलता अर्जित की है. आचार्य
वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के अनुसार आपके घर का हर हिस्सा महत्वपूर्ण है. घर के बेडरूम से किचन (Kitchen) तक वास्तु शास्त्र में कुछ नियम बताए गए हैं. आइए उनके बारे में जान लेते हैं. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति इन बातों का ध्यान रखता है तो वह कई प्रकार की समस्याओं से
धर्म और वास्तु शास्त्र में हर देवी-देवता की पूजा के कुछ नियम बताए गए हैं. हर देवी-देवता का बीज मंत्र प्रिय भोग, प्रिय फल अलग होता है. हर भगवान को पूजा में अलग-अलग चीजें अर्पित की जाती हैं. इस तरह विधि-विधान से पूजा करने पर ही वे प्रसन्न होते हैं. इसलिए पूजा-पाठ में इन नियमों
कुछ ही घंटों बाद नए साल 2023 का आगमन हो जाएगा. इस नए साल से दुनियाभर के करोड़ों लोगों की बहुत सारी आशाएं जुड़ी हुई हैं. ज्योतिष शास्त्र की मानें तो ग्रहों और नक्षत्रों की चाल के कारण नए साल का पहला महीना यानी जनवरी 2023 कई राशियों के लिए बहुत भाग्यशाली सिद्ध होने जा
दो दिन बाद वर्ष 2022 एक इतिहास बन जाएगा और हम वर्ष 2023 में विचरण कर रहे होंगे. सभी को उम्मीद है कि नया उनके लिए ढेर सारी खुशियां लेकर आएगा और उन्हें जीवन में किसी तरह की परेशानियां नहीं होंगी. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक अगर आप चाहते हैं कि नव वर्ष में आपके मंगल
आज 30 दिसंबर 2022, शुक्रवार को दुर्गा अष्टमी है. दुर्गाष्टमी का शुक्रवार के दिन पड़ना बहुत शुभ माना जाता है. साथ ही आज सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत योग भी पड़ने से ग्रह-नक्षत्रों का बेहद अद्भुत संयोग भी बन रहा. ऐसे में आज के दिन की गई माता की आराधना और विशेष पूजा अर्चना भक्तों
वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) में कई ऐसी चीजों का वर्णन किया गया है, जिन्हें करने से घर में सुख शांति और धन का आगमन बढ़ता है. पेड़-पौधों की बात करें तो वास्तु शास्त्र में तुलसी, शमी और मनी प्लांट को बहुत शुभ माना गया है. लेकिन आज हम आपको एक चमत्कारिक पौधे के बारे में
करवा चौथ का व्रत इस बार 13 अक्टूबर 2022 को रखा जाएगा. इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. करवा चौथ पर भगवान शिव और मां पार्वती की विशेष उपासना की जाती है. करवा चौथ के व्रत में पूजा की थाली का बहुत महत्व है. कई नवविवाहिता पहली बार
आर्थिक, मानसिक और शारीरिक दिक्कतों के चलते यदि आप बुरी तरह परेशान हैं और कई उपाय करने के बाद भी अभी तक शांति नहीं मिल रही है तो फिर आपको इस दीपावली में कुछ उपाय करने ही चाहिए. इन उपायों को करने से जहां आपको इन परेशानियों से मुक्ति मिलेगी. वहीं, आपके ऊपर मां लक्ष्मी
आचार्य चाणक्य भारत के महान दार्शनिक थे. इसके साथ चाणक्य (Chanakya) कूटनीति, अर्थशास्त्र और नीतिशास्त्र के विद्वान थे. आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति के दम पर चंद्रगुप्त मौर्य (Chandragupta Maurya) जैसे साधारण बालक को मगध का सम्राट बना दिया था. आचार्य चाणक्य की चाणक्य नीति (Chanakya Niti) में रिश्तों के बारे में भी विस्तार से
भारतीय संस्कृति में सिंदूर का बहुत महत्व है. पूजा-अर्चना में सिंदूर का अनिवार्य इस्तेमाल होता है. महिलाएं भी इसे अपनी मांग में धारण कर पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं. तंत्र विद्या में भी सिंदूर का इस्तेमाल किया जाता है. सिंदूर लाल और नारंगी का होता है. भगवान हनुमान पर नारंगी रंग का
नवरात्रि का आखिरी दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित है. यह मां दुर्गा का पूर्ण स्वरूप है और सबसे सिद्ध अवतार है. धर्म-शास्त्रों के अनुसार केवल नवमे दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा करके संपूर्ण नवरात्रि की पूजा-उपासना का फल पाया जा सकता है. मां सिद्धिदात्री मनुष्यों और देवताओं सभी को सिद्धियां देने वाली देवी हैं. लिहाजा
26 सितंबर से शुरू हुई शारदीय नवरात्रि 5 अक्टूबर तक चलेंगी. वहीं आज 3 अक्टूबर 2022, सोमवार को महाअष्टमी मनाई जाएगी. नवरात्रि की अष्टमी तिथि बहुत महत्वपूर्ण होती है, इसे दुर्गा अष्टमी भी कहते हैं. इस दिन से दुर्गा पूजा का जश्न अपने चरम पर रहता है. इस साल की महाअष्टमी इसलिए भी ज्यादा खास
कार्तिक माह भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है. इस साल 10 अक्टूबर से कार्तिक महीना शुरू हो रहा है. इस महीने में साल के कई प्रमुख व्रत-त्योहार पड़ते हैं. कार्तिक मास चातुर्मास का आखिरी महीना होता है. भगवान विष्णु भी 4 महीने की निद्रा के बाद इसी महीने की एकादशी को जागते हैं.
हिंदूओं के प्रमुख त्योहार दिवाली 24 अक्टूबर 2022 को मनाई जाएगी. वहीं, धनतेरस 23 अक्टूबर को है. धनतेरस हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन लोग खरीदारी करना शुभ समझते हैं. मान्यता है कि इस दिन खरीदारी करने से धन और ऐश्वर्य में वृद्धि होती है
आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) देश के ऐसे महान दार्शनिक रहे हैं, जिनकी सैकड़ों वर्ष पहले लिखी हुई बातें आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी पहले थीं. उन्होंने नीति शास्त्र (Niti Shastra) नामक एक महान ग्रंथ लिखा, जिसमें स्री और पुरुषों के गुण और अवगुणों के बारे में विस्तार से बताया गया है. इस ग्रंथ