अरपा नदी में बाढ़ : ट्रैक्टर जाने का रास्ता नहीं, इसके बाद भी अवैध उत्खनन धड़ल्ले से जारी


बिलासपुर/अनिश गंधर्व.  रेत की कालाबाजारी के चलते राज्य सरकार की जमकर किरकिरी हो रही है। जिला प्रशासन के आला अधिकारी रेत चोरी रोकने में नाकाम है और यही कारण है कि शहर के बीचों-बीच बहने वाली अरपा नदी पूरी तरह से खोखली हो रही है। एमपी, यूपी की तर्ज पर  रेत चोर गिरोह लगातार अवैध उत्खनन कर लाखों करोड़ों में खेल रहे हैं। नदी में इन दिनों बारिश के कारण बाढ़ है इसके बाद भी रेत माफिया मजदूरों के माध्यम से रेत खनन कर रहे हंै। दयालबंद पुल के आसपास रोजाना दर्जनों टै्रक्टर वाहन अवैध उत्खनन के लिये लगाया गया है। प्रतिबंधित मधुवन के रास्ते नदी में टे्रक्टर को घुसाकर किनारे-किनारे दयालबंद परिक्षेत्र में कई वर्षों से उत्खनन का खेल चल रहा है।
राज्य सरकार ने अरपा नदी की दुर्दशा को देखते हुए योजनाबद्ध तरीके से नदी के दोनों छोर पर सड़क व सरकंडा-पचरीघाट में डेम निर्माण की स्वीकृति दी है। लेकिन सत्ता से जुड़े हुए रसूखदार रेत माफिया नदी को तबाह करने में तुले हुए हैं। लाखों का रेत निकालकर डंप कर लिया गया है। मनमाने दाम पर रेत की बिक्री की जा रही है। नदी के ऊपरी क्षेत्र कोनी सेंदरी में बेतहाशा रेत निकाला जा चुका है। रेत माफियाओं के आंतक से ग्रामीण तस्त हैं। सत्ता पक्ष के दमदार लोग अरपा नदी का सीना छलनी करने में तुले हुए हैं। जिला प्रशासन के आला अधिकारी तो ठेके पर दिये घाटों में झांकने नहीं जाते। इधर प्रतिबंधित क्षेत्र दयालबंद में लगातार उत्खनन कर रेत डंप किया जा रहा है। गुण्डागर्दी के दम पर दिन रात नदी से रेत निकालने का क्रम जारी है। जिला प्रशासन के आलाअधिकारी भी अपनी आंखों में पट्टी बांध चुके हैं। नदी में डेम का निर्माण व इंदिरासेतु से शनिचरी रपटा के दोनों छोर में सड़क निर्माण का कार्य बारिश होने के कारण बंद पड़ा है। नदी में पानी और रास्ता नहीं होने के बाद भी रेत माफिया यूपी, एमपी की तर्ज पर अवैध उत्खनन कर रहे हैं।

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