नाबालिग के बलात्कारी को आजीवन कारावास

सागर. न्यायालय-श्रीमती नीतूकांता वर्मा, विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट सागर के न्यायालय ने नाबालिग लड़की का बलात्कार करने वाले आरोपी रामगोपाल दांगी पिता रामनाथ उम्र 31 वर्ष निवासी ग्राम अंतर्गत थाना बण्डा जिला सागर को दोषी पाते हुए अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में आजीवन कारावास एवं पाॅंच हजार रूपये के अर्थदण्ड तथा भादवि की धारा 376एबी के अंतर्गत 20 वर्ष का कठोर कारावास एवं पाॅंच हजार रूपये के अर्थदण्ड से तथा भादवि की धारा 363 एवं 366 के तहत 05-05 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1-1 हजार रूपये के अर्थदण्ड दण्डित करने का आदेश दिया। राज्य शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक/जिला अभियोजन अधिकारी राजीव रूसिया तथा विशेष लोक अभियोजक/सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी मनोज पटेल ने शासन का पक्ष रखा।

घटना का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि अभियोक्त्री की मां ने दिनांक-11.02.2021 को पुलिस थाना बण्डा में उपस्थित होकर मौखिक रिपोर्ट इस आशय की लेख कराई कि दिनांक-10.02.2021 को शाम साढ़े आठ बजे वह घर के अंदर खाना बना रही थी। घर के बाहर आंगन में उसकी लड़की अभियोक्त्री, उसका लड़का तथा आरोपी रामगोपाल आग ताप रहे थे। वह घर के अंदर काम कर रही थी। कुछ देर बाद वह घर के बाहर आंगन में जब आई तो उसे उसका लड़का अकेला बैठा दिखा तब उसने लड़के से पूछा कि अभियोक्त्री कहां है तो उसके लड़के ने बोला कि रामगोपाल बिस्किट खिलाने ले गया है। फिर उसने तुरंत अपने पति को बताया एवं अभियोक्त्री को ढूंढने लगी। लगभग एक घंटे बाद रामगोपाल अभियोक्त्री को कैंया (गोदी) लेकर उसके घर के बाहर टटा के पास छोड़कर जाने लगा और बोला कि ‘‘तुम्हारी मोडी कौन हिरा गई जा तो है‘‘ और चला गया। फिर उसने अभियोक्त्री से पूछा कि कहां गई थी उसे शक सा हुआ। उसने पूछा तो अभियोक्त्री ने बताया कि अभियुक्त उसे ले गया था और उसके साथ बुरा काम किया। उक्त रिपोर्ट के आधार पर से आरोपी के विरूद्ध थाना बण्डा में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई और प्रकरण अनुसंधान में लिया गया। विवेचना पूर्ण कर अभियोग पत्र माननीय न्यायालय में पेश किया गया। विचारण के दौरान अभियोजन ने अपना मामला संदेह से परे प्रमाणित किया। जिस पर से न्यायालय ने आरोपी रामगोपाल दांगी को दोषी पाते हुए अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में आजीवन कारावास एवं पाॅंच हजार रूपये के अर्थदण्ड तथा भादवि की धारा 376एबी के अंतर्गत 20 वर्ष का कठोर कारावास एवं पाॅंच हजार रूपये के अर्थदण्ड से तथा भादवि की धारा 363 एवं 366 के तहत 05-05 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1-1 हजार रूपये के अर्थदण्ड दण्डित करने का आदेश दिया।

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