लिंगियाडीह आंदोलन चरम पर, कोर्ट की सुनवाई से पहले सड़कों पर जनता का आक्रोश

 

सभी धर्म, समाज, संगठन और राजनीतिक दलों का मिल रहा समर्थन, सरकार पर गंभीर आरोप

बिलासपुर-लिंगियाडीह क्षेत्र में चल रहा विस्थापन विरोधी आंदोलन अब अपने चरम पर पहुंचता नजर आ रहा है। जल्द ही इस मामले की सुनवाई न्यायालय में होने वाली है, ऐसे में आंदोलनकारियों सहित पूरे जिले की निगाहें कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं। वहीं, दूसरी ओर इस आंदोलन को लगातार सामाजिक संगठनों, सभी धर्म समाजों और विभिन्न राजनीतिक दलों का खुला समर्थन मिलता जा रहा है।
आंदोलन के समर्थन में अब सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ-साथ राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी सक्रिय रूप से शामिल हो रहे हैं। इसी कड़ी में आंदोलन स्थल पर पहुंचे युवा नेता आशुतोष शर्मा ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला।
आशुतोष ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोग अपने परिवार, घर और महिलाओं के साथ इस भीषण गर्मी में धरने पर बैठने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा—
“सरकार गरीबों को उनके घर से निकालने के लिए नहीं होती, बल्कि उनके लिए पक्के मकान, पानी, नाली और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं देने के लिए होती है। लोगों को अटल आवास में ठूंस देना कोई समाधान नहीं है। इसी जमीन पर उन्हें आवास बनाकर दिया जाए, ताकि उनका जीवन और भविष्य बेहतर हो सके।
आशुतोष शर्मा जी ने आरोप लगाया कि यह पूरी योजना भूमाफियाओं और अपोलो प्रबंधन को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।
उन्होंने कहा—
“यह योजना सीधे-सीधे पैसे वालों के हित में है। गरीबों का आशियाना उजाड़ा जा रहा है। हम कंधे से कंधा मिलाकर इस आंदोलन में साथ रहेंगे, चाहे इसके लिए हमें बुलडोजर के सामने ही क्यों न खड़ा होना पड़े।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अब तक एक भी सक्षम अधिकारी या जनप्रतिनिधि आंदोलन स्थल पर पहुंचकर लोगों की सुध लेने नहीं आया है।
“घर तोड़ दिए गए हैं, लोग खुले आसमान के नीचे हैं। आने वाले दिनों में भीषण गर्मी में ये लोग और ज्यादा तड़पेंगे, इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?” — उन्होंने सवाल उठाया।
आंदोलन में शामिल महिलाओं की स्थिति पर भी उन्होंने चिंता जताई।
आशुतोष शर्मा ने कहा—
“घर की माताएं-बहनें अपने घरेलू कामकाज, परिवार और छोटे बच्चों को छोड़कर सड़कों पर बैठी हैं। वे अपने घर और अपनी छत बचाने के लिए भूख-प्यास सहते हुए आंदोलन कर रही हैं। यह किसी भी संवेदनशील सरकार के लिए शर्म की बात है।”
फिलहाल लिंगियाडीह आंदोलन दिन-ब-दिन तेज होता जा रहा है। कोर्ट की आगामी सुनवाई से पहले आंदोलनकारियों का हौसला बुलंद है और उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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