अब सुअर की किडनी से बचेगी मरीजों की जान, सफल हुआ दुनिया का पहला ऑपरेशन

वॉशिंगटन. दुनिया में खराब किडनी से जूझ रहे लाखों लोगों को ट्रांसप्लांट के अभाव में अब अपनी जान नहीं गंवानी पड़ेगी. डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट  के लिए ऐसा क्रांतिकारी तरीका खोज लिया है. जिससे दुनिया में लाखों मरीजों की जिंदगी बचाने का रास्ता साफ हो गया है.

दुनिया में पहली बार हुई सर्जरी
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में दुनिया में पहली बार सुअर की किडनी को इंसान के शरीर में ट्रांसप्लांट किया गया है. यह कारनामा न्यूयॉर्क शहर के एनवाईयू लैंगोन हेल्थ मेडिकल सेंटर के सर्जनों ने किया है. ट्रांसप्लांट होने के बाद सुअर की किडनी मरीज के शरीर में सही ढंग से काम कर रही है.

सुअर की किडनी इंसान को लगाई गई
सर्जरी में भाग लेने वाले डॉक्टर पैनल के हेड डॉ रॉबर्ट मोंटगोमरी ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी. उनके मुताबिक जिस मरीज में सुअर की किडनी लगाई गई, वह काफी समय से ब्रेन डेड हो चुका था. हालांकि उसका दिल और दूसरे अंग अब भी काम कर रहे हैं. उस मरीज के परिवार वालों से परमीशन लेकर डॉक्टरों ने लंबी सर्जरी करके सुअर की किडनी (Pig Kidney) मरीज के शरीर से बाहर एक बड़ी धमनी से जोड़ी. जिससे उसे खून और ऑक्सीजन मिलती रहे.

किडनी से पेशाब छानकर अलग कर दिया
इसके बाद डॉक्टरों ने 2-3 दिन तक लगातार मरीज पर निगरानी रखी. डॉक्टरों की हैरानी का उस समय कोई ठिकाना नहीं रहा, जब मरीज के शरीर ने सुअर की किडनी को स्वीकार कर लिया. उस किडनी ने बॉडी में बनने वाले कचरे को सफलतापूर्वक छानकर पेशाब को अलग कर दिया. किडनी ने मरीज के शरीर में पेशाब की उतनी ही मात्रा बनाई, जितना कोई इंसानी किडनी बनाती है.

मरीज का क्रिएटिनिन का स्तर भी सामान्य
डॉ रॉबर्ट मोंटगोमरी ने कहा कि ट्रांसप्लांट की गई सुअर की किडनी सही ढंग से काम कर रही है. उसके सारे नतीजे अब तक बढ़िया रहे हैं. मरीज की किडनी खराब होने के बाद उसमें क्रिएटिनिन का स्तर असामान्य हो गया था. अब सुअर की किडनी लगने के बाद वह लेवल फिर से नॉर्मल हो गया है. यानी कि मरीज की बॉडी ने उस किडनी को पूरी तरह अडॉप्ट कर लिया है.

मानव अंगों की कमी हो सकेगी पूरी?

रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में मानव अंगों की काफी कमी है. जिसकी वजह से रोजाना हजारों मरीज जान गंवाने को मजबूर हैं. इस कमी को दूर करने के लिए सुअर के ऊपर काफी दिनों से अलग-अलग देशों के वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं. अब तक की रिसर्च में पता चला था कि सुअर की कोशिकाओं मे मौजूद शुगर की वजह से इंसानी शरीर उसे स्वीकार नहीं करता है.

सुअर के जीन में किए गए बदलाव
इसके बाद डॉक्टरों ने स्पेशल मोडिफाइड जीन वाले सुअर का इस्तेमाल किया. उस सुअर के सेल में मौजूद शुगर को खत्म करने और इम्यून सिस्टम के हमले से बचने के लिए कुछ जेनेटिक बदलाव किए गए. जब यह जेनेटिकली मोडिफाइड सुअर तैयार हो गया तो फिर उसकी किडनी निकालकर ब्रेन डेड हो चुके मरीज के शरीर में लगाई गई, जिसने बढ़िया तरीके से काम करके मानव अंगों की कमी पूरी करने के लिए शानदार रास्ता दुनिया को दे दिया.

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