May 18, 2024

पुलिस का खुफिया तंत्र हुआ कमजोर: शहर व आसपास के इलाकों में पनप रहा संगीन अपराध

बिलासपुर/अनिश गंधर्व। पुलिस का खुफिया तंत्र कमजोर होने के कारण शहर व आसपास के गांवों में संगीन अपराध तेजी से बढ़ रहा है। नशे का कारोबार, जमीन खाली कराने और अवैध उत्खनन करने वालों के संरक्षण में बाहरी लोग यहां पैर पसार रहे हैं। पुलिस द्वारा निजात अभियान के बाद प्रहार अभियान चलाकर अपराध पर काबू पाने की दिशा में काम किया जा रहा है। किंतु पुलिस के ही कुछ कर्मचारियों की मिली भगत से मवेशी तस्कर, जुआ- सट्टा, गांजा व नशे का कारोबार वर्षों से शहर व आस-पास के गांवों में फल-फूल रहा है। मालूम हो कि पुलिस की संयुक्त टीम ने जान जोखिम में डालकर गांजा व मवेशी तस्करी के कारोबार से जुड़े दस लोगों को हिरासत में लिया है। अपराध को अंजाम देने वालों का हौसला इतना बुलंद है कि वे पुलिस पर भी भारी पडऩे लगे हैं। कट्टा, पिस्टल व हथियार से सरेआम घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस का खुफिया तंत्र कमजोर होने के कारण शहर व गांवों में बाहरी लोग आसानी से अपना ठिकाना बना रहे हैं। इधर शहर में जुआ-सट्टा अवैध शराब का कारोबार करने वालों पर खानापूर्ति की कार्रवाई की जाती है। पुलिस द्वारा अपराध पर रोक लगाने के लिए बकायदा अभियान चलाया जाता है किंतु सच्चाई यही है कि अवैध कारोबार का संचालन पूरी इमानदारी के साथ किया जा रहा है। पुलिस थानों में जमे नामी कर्मचारियों के संरक्षण में जुआ-सट्टा, गुंडागर्दी और नशे के कारोबार का संचालन किया जा रहा है।

वर्दी का नहीं दिख रहा खौफ

पुलिस कर्मचारी नियमों का पालन नहीं करते। ड्यूटी के दौरान उन्हें पूरी तरह से विभाग द्वारा दिए गये निर्देशों का पालन करना चाहिए ताकि अपराधियों में खौफ बना रहे। आरक्षक, हवलदार एएसआई एसआई और थाना इंचार्ज भी नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। एक पुलिस कर्मचारी ने बताया कि विभाग द्वारा ओहदे के हिसाब सभी को हथियार उपलब्ध कराया गया है किंतु आज के पुलिस कर्मचारी बिना सुरक्षा के ही ड्यूटी करते हैं, विभागीय दबाव नहीं होने के कारण सिपाही भी बिना डंडे के चलते हैं।

पहले ऐसा नहीं था

आज से कोई दो दशक पहले पुलिस थानों में मुखबिर व कोतवार की अहम भूमिका होती थी। बाहरी लोग कहां आकर ठहरे और क्या काम कर रहे हैं। सारी गतिविधियों की जानकारी पुलिस के पास पहुंच जाती थी। सरलता से अपराधियों की धरपकड़ की जाती थी। आज के दौर में पुलिस केवल खुफिया तंत्र के सहारे काम कर रही है। थानों में जमे नामी पुलिस कर्मचारी अपने क्षेत्र के अवैध कारोबार करने वालों को बढ़ावा देते हैं।

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