December 29, 2021
हिंदू समाज की भावना को ठेस पहुंचाने के आरोप में सनातनी हिंदू समाज द्वारा निकाली गई जिला प्रशासन के खिलाफ विरोध पदयात्रा
बिलासपुर. बहुसंख्यक हिंदू समाज अपने ही देश में दोयम दर्जे की नागरिकता वाला जीवन जीने को मजबूर है। राजनीतिक तुष्टिकरण की वजह से यह परिस्थितियां बनी है। खासकर छत्तीसगढ़ और बिलासपुर में पिछले 3 सालों में हालात हिंदुओं के विपरीत होते दिख रहे हैं। सनातनी हिंदू समाज के प्रतीक चिन्हों के प्रति प्रशासनिक दुर्भावना स्पष्ट नजर आ रही है, जिसके विरोध में सनातनी हिंदू समाज द्वारा जिला प्रशासन के खिलाफ पदयात्रा निकाली गई। बिलासपुर में लगातार इस तरह के प्रयोग हो रहे हैं, जिससे हिंदू समाज को नीचा दिखाया जाए और दीगर समाजों का तुष्टिकरण हो। मगरपारा चौक में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर आइलैंड के साथ भगवान विश्वकर्मा द्वार को भी हटा दिया गया, लेकिन कुछ ही समय बाद यहां वर्ग विशेष को खुश करने के लिए शहीद अशफाक उल्ला द्वार का निर्माण आरंभ कर दिया गया। सतनामी समाज की प्रेरक मिनी माता की प्रतिमा को भी भारती नगर चौक से हटा दिया गया।
बाबा गुरु घासीदास जी के नाम से बनने वाले द्वार पर प्रतिबंध, सिंधी कॉलोनी के प्रवेश द्वार भक्त कंवरराम द्वार को दुर्घटना में टूटने के बाद फिर वापस ना बनाना, बंधवापारा तालाब में हनुमान मंदिर को तोड़े जाने के बाद प्रतिमा की पुनर्स्थापना अब तक ना किया जाना जैसे तमाम उदाहरण भरे पड़े हैं। जिसे लेकर हिंदू समाज में रोष है। जिला प्रशासन द्वारा हिंदू समाज विरोध में कार्य करने और प्रशासनिक मशीनरी का सनातनी हिंदू समाज के विरोध में दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए सनातनी हिंदू समाज द्वारा बुधवार को मगरपारा चौक से पदयात्रा रैली निकाली गई, जिसमें अलग-अलग हिंदू संगठनों के अलावा आम सनातनी भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। जय श्री राम के उद्घोष के साथ सत्यम चौक, नेहरू चौक होते हुए यह रैली कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां कोई भी जिम्मेदार पदाधिकारी ज्ञापन स्वीकार करने सामने नहीं आया। उल्टे रैली को देखकर कलेक्ट्रेट के गेट बंद कर दिए गए, जिससे नाराज आंदोलनकारी सड़क पर ही बैठ गए और हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे। बाद में अतिरिक्त कलेक्टर ने ज्ञापन लिया। इस दौरान रैली की अगुवाई कर रहे लोगों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही उनकी मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार नहीं किया गया तो फिर एक बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा। इस विरोध रैली में सनातनी हिंदू समाज के अलावा विश्वकर्मा समाज, विश्वकर्मा पूजा समिति ,आदर्श मित्र मंडल, विश्व हिंदू परिषद, धर्म जागरण समन्वय विभाग, बजरंग दल , धर्म सेना और मगरपारा के नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए।