जो आपदा में कमाई और लूट के अवसर ढूंढ सकते हैं, अकाल मौतों को छुपाने में राहत महसूस कर सकते हैं, बर्बादी और विनाश में आल्हाद देख सकते हैं, वे भला उत्सव और समारोहों के मौकों को भी त्रासद और विभाजन का जरिया बनाने से क्यों बाज आने लगे!! ठीक यही काम, अपने नाम ‘डिवाइडर
रायपुर. भाजपा आपदा में अवसर तलाशने के चलते कोरोना से मृत लोगो के बेसहारा लोगो में नित नये भ्रम फैला रही है, प्रदेश भारतीय जनता पार्टी का यह आरोप पूरी तरह निराधार और राजनीति प्रेरित है कि, कोरोना-काल में अनाथ हुए बच्चों के भविष्य को लेकर राज्य सरकार द्वारा किसी तरह की लापरवाही बरती जा
बिलासपुर. कोरोना की इस आपदा की घड़ी में पूरा विश्व जहां परेशान नजर आ रहा है वहीं एक बड़ी जनसमुदाय के भुखमरी से मरने का खतरा भी खड़ा हो गया है छत्तीसगढ़ में भी बढ़ते कोरोनावायरस को देखते हुए जिला प्रशासन और राज्य सरकार द्वारा लॉक डाउन की तारीखों में लगातार विस्तार किया जा रहा
बिलासपुर. कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के दौर में भी अपनी ठोस इरादों के साथ दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा आपदा को अवसर में बदलते हुए न केवल रिकार्ड के मैंटेनेंस के कार्य किए गए बल्कि अधोसंरचना संबंधी कार्य भी तीव्र गति से पूर्ण किया गया । इसके साथ ही साथ कोरोनाकाल में भी दक्षिण पूर्व
साल 2020 सभी के लिए कुछ अलग ही रहा। जहाँ कोविड-19 आना कहर बरसा था रहा, वही कुछ लोग के लिए ये आपदा का समय एक सेवा का मौका बनाता गया। इस समय कई संस्थाओं ने ज़रूरतमंदों की मदद के सभी सम्भव प्रयास किए। जरूरतमंदों की मदद liye समर्पित संस्थाओं में से एक – सेंटर
किसी भी आपदा में हमेशा तत्पर रहने वाली व त्वरित कार्रवाई करने वाली एनडीआरएफ टीम अपने साजो सामान के साथ बहराइच प्रशासन के साथ मिलकर बहराइच के बाढ़ प्रभावित लोगों को लगातार सहयोग कर रही है वा बाढ़ से बचाव व प्राथमिक उपचार के तरीकों से अवगत करा रही है. इसी क्रम में 25 अगस्त
(आलेख : बादल सरोज) कोरोना की आपदा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि खतरे में सिर्फ भात-रोटी, छत-रोजगार और जिंदगी भर नहीं है। खतरे में पूरी दुनिया है – वह पृथ्वी है, जिस पर मनुष्यता बसी है। जंगल नेस्तनाबूद कर दिए, नदियाँ सुखा दीं, धरती खोदकर रख दी, पशु-पक्षियों को उनके घरों