अनिल बेदाग़.जज़्बा क़ायम रहा तो मुश्किलों का हल भी निकलेगा। जमीं बंजर हुई तो क्या वहीं से जल भी निकलेगा। ना हो मायूस ना घबरा अंधेरों से मेरे साथी। इन्हीं रातों के दामन से सुनहरा कल भी निकलेगा। यक़ीनन, बॉलीवुड के उन कलाकारों पर यह पंक्तियां फिट बैठती हैं, जो संघर्षों से हार नहीं मानते।
बिलासपुर. जज़्बा द्वारा पुनः मानवता का परिचय दिया गया। सारा दिन मरीज़ के परिजनों को भटकने के बाद भी जब डोनर नहीं मिला। तब जज़्बा उम्मीद की किरण बनकर सामने आई। यूनिटी हॉस्पिटल में भर्ती मरीज़ कृष्ण कुमार आर्य के लिए सिंगल डोनर प्लेटलेट्स एस. डी. पी. की ज़रूरत थी। परिजन सारा दिन डोनर ढूंढते
बिलासपुर. नेहरू चौक नया सरकंडा पुल के पास रहने वाले अनिमेष दीक्षित से जज़्बा के संयोजक संजय मतलानी द्वारा संपर्क कर उनसे इस महामारी में आगे आने और रक्तदान करने की अपील की गई। अनिमेष तुरंत तैयार हो गए और एकता ब्लड बैंक मगरपारा पहुंच कर उन्होंने रक्तदान किया। जिसके फलस्वरूप योगेश की जान बच
बिलासपुर. कोरोना काल में भी जज़्बा का हौसला कम नहीं हो रहा है,विपरीत परिस्थितियों के बावजूद जहाँ जिसे मदद की ज़रूरत पड़ी जज़्बा आगे आ कर उनके काम आ रही है। बिलासपुर शहर की सबसे अग्रणी रक्तदाता टीम जज़्बा एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी जो जानी जाती है थैलेसीमिया जागरूकता और ब्लड डोनेशन के नाम से
बिलासपुर. जज़्बा ने अपने नए कार्यालय का उद्घाटन धनतेरस के शुभ अवसर पर किया। खास बात यह रही कि कार्यालय का उद्घाटन भी उन्ही थैलासीमिया पीड़ित बच्चों के हाथों से करवाया गया जिनके लिए दिन रात मेहनत कर रही है। टीम जज़्बा दीवाली के उपलक्ष्य में बिलासपुर निवासी जितेंद्र राही ने अपने दोनों बच्चों नृत्या
बिलासपुर.जज़्बा द्वारा विश्व रक्तदाता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित रक्तदान शिविर में शहर के युवाओं और खासकर युवतियों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। जज़्बा के संयोजक संजय मतलानी ने बताया कि वो पिछले 7 सालों से लगातार इस दिन को खास बनाने के मक़सद से शिविर का आयोजन करते आये हैं। हर बार शहर
बिलासपुर. अब तक जज़्बा ने इन 4 सालों में 40 से ज़्यादा रक्तदान शिविर आयोजित किये , 10 से अधिक स्वास्थ परीक्षण शिविर एंव 5 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर बिलासपुर जिले के युवाओं में रक्तदान के प्रति जागरूकता लाने का कार्य किया । जज़्बा की मेहनत और उपलब्धियों की बात की जाए तो अब बिलासपुर