नाबालिक बालिका को बंधक बनाकर गलत काम करने वाले आरोपी को हुई सजा
भोपाल. संभागीय जनसम्पर्क अधिकारी मनोज त्रिपाठी, भोपाल ने बताया कि दिनांक 30/07/2024 न्यायालय सुनील दंडोतिया 14वे अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट ) , के द्वारा बंधक बनाकर दुष्कर्म करने वाले आरोपी मनीष यादव को धारा 376 (2)(एन), 376(3), 363, 366 भादवि एवं 5आई/6 पॉक्सो एक्ट में दोष सिद्ध पाते हुये आरोपी मनीष यादव को धारा 376 (2)(एन), 376(3) भादवि एवं 5आई/6 पॉक्सो भादवि में 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 7000 रू अर्थदण्ड, एवं धारा 363, 366 भादवि मे 07 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 3,000 रू अर्थदण्ड से दण्डित का निर्णय पारित किया है । उक्त प्रकरण में शासन द्वारा की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्री त्रिभुवन प्रसाद गौतम, श्रीमती सरला कहार, श्रीमती लक्ष्मी कसाव द्वारा पैरवी की गई है।
घटना का संक्षिप्त विवरण :-
दिनांक 21/05/2022 को अभियोक्त्री की माता ने थाना छोला मंदिर भोपाल मे उपस्थित होकर सूचना दी कि उसकी पुत्री जिसकी आयु लगभग 16 वर्ष है, वह दिनांक 21/05/2022 को सुबह 08:15 बजे मंदिर मे पूजा करने का कहकर घर से गई थी जो कि घर वापस नही आई आसपास एवं रिश्ते दारों का पता करने पर कही नही मिली पुलिस द्वारा गुम इंसान 72/2022 की रिपोर्ट दर्ज कर जॉच शुरू की गई, पुलिस द्वारा अभियोक्त्री को दस्तायाब किया गया दस्तायाबी के दौरान अभियोक्त्री ने बताया कि वह दिनांक 21/05/2022 को सुबह 08:15 बजे मंदिर जल चढाने जा रही थी तभी रास्ते मे आरोपी मनीष यादव ने मेरे सामने गाडी आकर रोकी और जबरदस्ती मेरा हाथ पकडकर अपनी मोटरसाईकिल पर बैठने लगा मैने मना किया तो जान से मारने की धमकी दी डर के कारण मे उसकी मोटरसाईकिल पर बैठ गई और वह अपने घर ले गया जहॉ पर 4 चार दिन तक मेरे साथ मेरी मर्जी के बिना गलत काम करता रहा और जब भी जाने का बोलती तो आरोपी मनीष मुझे जान से मारने की धमकी देता था डर के कारण कुछ नही बोलती फिर पुलिस आ गई, उक्त सूचना के आधार पर पुलिस थाना छोला मंदिर द्वारा अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना मे लिया गया सम्पूर्ण विवेचना उपरान्त अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। न्यायालय द्वारा अभियोजन के साक्ष्य, तर्को, दस्तावेजी साक्ष्य से सहमत होते हुऐ एवं वैज्ञानिक साक्ष्य (डी.एन.ए.) प्रमाणित होने के आधार पर आरोपी मनीष यादव को धारा 376 (2)(एन), 376(3) भादवि एवं 5आई/6 पॉक्सो भादवि में 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 7000 रू अर्थदण्ड एवं धारा 363, 366 भादवि मे 07 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 3,000 रू अर्थदण्ड से दण्डित का निर्णय पारित किया है ।