Coronavirus से लड़ने के लिए महिलाएं हैं ज्यादा मजबूत, मगर पुरुषों के लिए है खतरा
कोरोना वायरस एक ऐसी बीमारी है जो हर उम्र और लिंग के लोगों को समान रूप से प्रभावित करती है। फिर भी इसकी तीव्रता कई कारकों जैसे कि प्रतिरोधक क्षमता और आपके लिंग वगैरह पर भी निर्भर करती है । पिछले कुछ महीनों में किये गये बहुत सारे अध्ययन में यह देखा गया है कि औरतें कोविड-19 से कम पीड़ित हो रहीं हैं, इसलिए उनकी मृत्यु दर भी कम रहने वाली है।
पिछली महामारियों में भी पुरुषों की बजाए औरतों को जीवित बच जाने के ज्यादा बेहतर मौके मिले। इसके बहुत सारे कारण हो सकते हैं जो असल में पुरुष के कमजोर होने की तरफ इशारा करते हैं।
शुक्र है स्त्रियों के शरीर में उपस्थित क्रोमोसोम और हार्मोन के अनूठे समागम का, जिसकी वजह से स्त्रियों में ACE-2 रिसेप्टर्स की संख्या लगभग दुगनी हो सकती है, जिससे उन्हें कोविड-19 होने का खतरा बहुत कम हो जाता है। जाने-माने रिसर्चर ने अपने अध्ययन में पाया कि ACE-2 की ज्यादा संख्या आपके सिस्टम से वायरस को छान कर अलग कर देती है और शरीर को एक हद तक सुरक्षित रखती है।
इसकी तुलना में कुछ स्टडीज में पाया गया कि ना केवल पुरुषों में पाए जाने वाले ACE-2 रिसेप्टर्स कम होते हैं, बल्कि कमजोर भी होते हैं। जिससे उन्हें इंफेक्शन होने का रिस्क ज्यादा होता है। पुरुषों में पाए जाने वाले ACE-2 रिसेप्टर्स उनके प्रजनन तंत्र के आसपास ज्यादा पाए जाते हैं। दुर्भाग्य से जिससे उनमें इरेक्टाइल डिस्फंक्शन हो सकता है और उनकी प्रजनन क्षमता पर भी असर पड़ता है। यह एक पोस्ट कोविड-19 लक्षण बनकर सामने उभर रहा है। इसके अलावा स्त्रियों को बहुत सारे अन्य आनुवांशिक वरदान का लाभ भी मिला है जिससे उन्हें आश्चर्यजनक रूप से कोविड-19 से कम खतरा है।
एक एक्स्ट्रा X क्रोमोसोम कैसे करता है स्त्रियों की रक्षा?
पुरुषों में कई बार देखा गया है कि वह टेस्ट कराने को टालते रहते हैं व बीमारी की गंभीरता को हल्के में लेते हैं। पुरुषों में धूम्रपान, शराब का सेवन और तंबाकू सेवन भी ज्यादा पाया जाता है जो कोविड-19 के खतरे को ज्यादा बढ़ाता है। यद्यपि इस निष्कर्ष के अधिक प्रमाण नहीं है, फिर भी यह कोविड-19 की गंभीरता का एक कारण हो सकता है।