बिलासपुर. राजस्व विभाग में फ़र्जीवाड़ा रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। ताज़ातरींन घटना में पटवारी किशनलाल धीवर का नया फ़र्जीवाड़ा सामने आया है। सूरज सिंह ने लिखित में कमिश्नर बिलासपुर को शिकायत पेश किया है कि मंगला में उसने 600 वर्गफूट ज़मीन रजिस्ट्री करवायी थी । तहसीलदार ने ऑनलाइन नामांतरण आदेश कर दिया
बिलासपुर. नगर निगम के राजस्व विभाग के अधिकांश अधिकारी-कर्मचारी इतने निकम्मे हैं कि वे 10 माह में अपने वेतन के लायक तक संपत्ति कर की वसूली नहीं कर पा रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि राजस्व विभाग के 12 ऐसे कर्मचारियों को नगर निगम पाल रहा है, जिन्होंने 10 माह में 5 से लेकर 30
बिलासपुर। जिले में भ्रष्टाचार का खुला खेल राजस्व विभाग द्वारा खेला जा रहा है। सरकारी रिकार्ड की चोरी और मिशल बंदोबस्त को गायब करने के बाद पटवारी सरकारी व निजी जमीनों को भू-माफियाओं को बेच चुके हैं। भाजपा शासन काल में भी पटवारी व तहसीलदार जमकर घालमेल करते रहे अब कांग्रेस शासन काल में भी
बिलासपुर. इस समय बिलासपुर राजस्व विभाग सुर्खियों में है। एक तरफ वकीलों ने बिलासपुर कलेक्टर को तहसीलदारों की शिकायत करते हुए ने कहा कि तहसील में दलालों का वर्चस्व है। उनके काम को तहसीलदार नहीं कर रहे है। वही कोनी आरआई की शिकायत भी किसान ने कलेक्टर से की, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं।
बिलासपुर/अनिश गंधर्व. राजस्व विभाग के रिकार्ड में दर्ज देव स्थल मद की भूमियां गायब हो चुकी हैं। बिना सिर पैर के विभाग के अधिकारी जमीनों का बंटाकन, नामांकन का काम कर रहे हैं। सरकारी जमीनों की रखरखाव करने के लिए जो नियम कानून बनाये गए थे उन सभी नियमों को दरकिनार कर राजस्व विभाग के
बिलासपुर. कलेक्टर डाॅ. सारांश मित्तर ने तखतपुर विकासखण्ड में राजस्व विभाग के अमले द्वारा किये जा रहे गिरदावरी कार्य का निरीक्षण किया। वे खेतों में उतरे और स्थल पर गिरदावरी के कार्य को बारीकी से देखा और निर्देशित किया कि शत् प्रतिशत शुद्धता के साथ गिरदावरी का कार्य किया जाये। राज्य शासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता
बिलासपुर. कोरोना काल में कलेक्टर का जन दर्शन नहीं लगाया जा रहा है वहीं जनसुनवाई के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था शासन प्रशासन द्वारा नहीं की गई है। इसका सीधा फायदा राजस्व विभाग में तैनात अधिकारी-कर्मचारी और उनके दलाल उठा रहे हैं। सरकारी जमीनों के रख-रखाव के लिए जहां एक ओर रेरा कानून बनाया गया है
बिलासपुर. राजस्व विभाग दलालों को पालने वाला विभाग बन गया है। यहां खुलकर सौदेबाजी की जाती है, आये दिन पैसों के लेनदेन को लेकर न्यायालय में विवाद होना आम बात है। नजूल न्यायालय और तहसील कार्यालय में आरआई, पटवारी और सहायकों को हिस्सा देने के बाद तहसीलदार को मोटी राशि देना पड़ता है। राज्य का