“बने करे रमन” लिखकर कवर्धा के आत्महत्या करने वाले किसान परिवार को अपमानित करने वाले आज आंसू बहा रहे है
रायपुर. छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता एवं सचिव विकास तिवारी ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के आरोपों पर सिलसिलेवार जवाब देते हुवे कहा कि किसानों की आत्महत्या पर राजनीति करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को यह बताना चाहिए कि उनके गृह जिले कबीरधाम में किसान लगातार आत्महत्या कर रहे थे तब वह खामोश क्यो थे कवर्धा जिले के किसान ने अपने सुसाइड नोट में आत्महत्या का कारण कर्ज से परेशान में बताया था और लिखा था कि “बने करे रमन“ इस पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह क्या कहेंगे क्या अपनी सरकार के किसान विरोधी कार्यों पर जवाब देंगे।रमन राज में के अंतिम तीन वर्षों में आठ सौ से अधिक किसानों ने आत्महत्या की थी भाजपा ने वादा किया था कि इक्कीस सौ रु धान समर्थन मूल्य और तीन सौ रु बोनस हर वर्ष दिया जायेगा पर चुनाव जीतने के बाद भारतीय जनता पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने किसानों को धोखा दिया और अब किसान मुद्दे पर घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं।
प्रवक्ता विकास तिवारी ने कहा कि बस्तर के जिस किसान ने आत्महत्या की है वह दुखद है प्रारंभिक जांच पर यह पता चला कि उनके परिवार में 4 वर्ष के पुत्र के निधन के बाद वह लगातार अवसाद ग्रस्त रहते थे इस विषय पर राजनीति करने वाले भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को अपने गिरेबान में झांक कर देखना चाहिये की लगातार पंद्रह वर्षों के शासनकाल में प्रदेश के किसानों की दुर्दशा करने वाले भाजपा नेता अब किसान हितैषी बनने का ढोंग कर रहे हैं जबकि रमन राज में रोजाना औसतन दो किसान आत्महत्या किया करते थे पिछले दो वर्षों से कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के जन हितैषी एवं किसान हितैषी फैसलों से किसानों को राहत मिली है कांग्रेस सरकार आते ही लगभग सोलह लाख से अधिक किसानों का ग्यारह हजार करोड़ का कर्जा माफ किया गया और धान समर्थन मूल्य स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश से भी ज्यादा पच्चीस सौ रु दिया जा रहा है गोधन न्याय योजना के तहत किसान और पशुपालक गोबर बेचकर आमदनी कमा रहे हैं और इस वर्ष धान खरीदी पूरे प्रदेश में लगभग 90 लाख मैट्रिक टन से अधिक होगी जिसे देख किसान विरोधी भारतीय जनता पार्टी के नेता तिलमिला और बौखला उठे हैं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जो खुद की किसान है और लगातार किसान हित के कार्यों की मॉनिटरिंग स्वयं कर रहे हैं जिसका नतीजा यह है कि छत्तीसगढ़ के किसान खुशहाली की ओर बढ़ रहे हैं।