हरिद्वार में स्थापित हुआ 5211 किलो का विश्वविख्यात पारद शिवलिंग

हरिद्वार में स्थापित हुआ विश्व का विशाल पारद शिवलिंग पारा
मुंबई /अनिल बेदाग : हरिद्वार की पावन धरती ने एक बार फिर आध्यात्मिक इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में अपना नाम दर्ज करा दिया। गंगा तट पर स्थित श्री साई शिव गंगा धाम में जब 5211 किलोग्राम वजनी विश्व के विशाल पारद शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई, तब केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रद्धा, साधना और मानव कल्याण का विराट संगम देखने को मिला। वैदिक मंत्रोच्चार, संतों के आशीर्वाद और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को एक दिव्य उत्सव का स्वरूप प्रदान कर दिया।
तीन दिनों तक चले इस भव्य समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से आए 2000 से अधिक श्रद्धालुओं, साधकों और संत-महात्माओं ने भाग लेकर इसे आध्यात्मिक ऊर्जा का महाकुंभ बना दिया। गुरु गोरक्षनाथ महाराज की परंपरा, गिरनार के पूज्य पीर योगी महंत सोमनाथ बापू के आशीर्वाद और पद्मभूषण डॉ. विजय भटकर के मार्गदर्शन में सम्पन्न इस आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं था, बल्कि विश्व शांति, सकारात्मक ऊर्जा और मानव कल्याण का संदेश प्रसारित करना भी था।
इस अद्भुत पारद शिवलिंग के पीछे ध्यान गुरु रघुनाथ गुरुजी की लगभग एक दशक लंबी तपस्या, अनुसंधान और पारद विज्ञान के गहन अध्ययन की कहानी जुड़ी है। पारा, चांदी, स्वर्ण तथा 108 प्रकार की जड़ी-बूटियों के अर्क से निर्मित यह शिवलिंग आध्यात्मिक विज्ञान और प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा का अनूठा उदाहरण माना जा रहा है। रघुनाथ गुरुजी का मानना है कि यह शिवलिंग केवल पूजा का केंद्र नहीं, बल्कि ध्यान, आत्मचिंतन और चेतना जागरण का माध्यम है, जो सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
समारोह में अनेक प्रतिष्ठित संतों और धर्माचार्यों की उपस्थिति ने इसकी गरिमा को और बढ़ाया। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी जी महाराज, श्री सुधांशु जी महाराज, स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज, स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज, स्वामी रविन्द्र पुरी जी महाराज, साध्वी ऋतंभरा जी, आचार्य मनीष जी सहित कई आध्यात्मिक विभूतियों ने अपनी उपस्थिति से आयोजन को विशेष बना दिया। वहीं सांसद राघव चड्ढा, गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की सहभागिता ने इसे सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण आयाम प्रदान किया।
इस विराट आयोजन की सफलता के पीछे उद्योगपति एवं समाजसेवी राजीव बंसल का समर्पण और सक्रिय योगदान भी विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। उन्होंने पूरे आयोजन के समन्वय और व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राजीव बंसल ने इसे साईं बाबा की कृपा बताते हुए कहा कि इस दिव्य कार्य का हिस्सा बनना उनके जीवन का सौभाग्य और सेवा का अवसर है। ध्यान गुरु रघुनाथ गुरुजी का व्यक्तित्व केवल आध्यात्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। वे दिव्यांग आत्मनिर्भरता, महिला किसान सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और नवाचार आधारित सामाजिक अभियानों से भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। दिव्यांग इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री  के माध्यम से दिव्यांगजनों को स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयास उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
समारोह के समापन पर जब “ध्यान से शांति, शांति से सद्भाव और सद्भाव से विश्व कल्याण” का संदेश गूंजा, तब उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता, सामाजिक समरसता और वैश्विक कल्याण की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल के रूप में अनुभव किया। हरिद्वार की यह ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा आने वाले वर्षों में श्रद्धा, साधना और सकारात्मक चेतना के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद की जाएगी।

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