हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का संकल्प: डॉ. संगीता

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

दिल्ली में होगा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

बिलासपुर. विश्व हिंदी परिषद की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संगीता बनाफर ने हिंदी को राष्ट्रभाषा के पद पर प्रतिष्ठित करने के संकल्प के साथ एक बड़े अभियान का आह्वान किया है। इस अवसर पर उन्होंने जांजगीर-चांपा जिले के नवनियुक्त ऊर्जावान पदाधिकारियों और क्षेत्र के प्रतिष्ठित साहित्यकारों के प्रति अपना सम्मान प्रकट करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई दी।
उन्होंने कहा कि जांजगीर की साहित्यिक विरासत अत्यंत समृद्ध है और यहाँ के विद्वानों की शब्द-साधना पूरे देश के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह ऊर्जावान टीम समाज में हिंदी की अलख जगाने और भाषाई एकता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
​उन्होंने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि विश्व हिंदी परिषद के तत्वावधान में आगामी 30 और 31 अक्टूबर को दिल्ली के ‘अटल स्मृति’ में भव्य अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन के माध्यम से हिंदी को वैश्विक पटल पर मजबूती से स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए विद्वानों से शोध पत्र भी आमंत्रित किए गए हैं। डॉ. बनाफर ने अपील की है कि हिंदी को राष्ट्रभाषा के गौरवपूर्ण स्थान तक पहुँचाने के लिए इस वैश्विक आयोजन में अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित की जाए।
​उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि हम सबको एकजुट होकर कार्य करना होगा ताकि छत्तीसगढ़ की गौरवशाली साहित्यिक और सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊँचाइयां मिल सकें। उन्होंने युवाओं और प्रशासन से भी हिंदी को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
डॉ. बनाफर के अनुसार, हिंदी हमारी राष्ट्रीय एकता और संस्कृति की आत्मा है। सामूहिक प्रयासों से ही हिंदी को उसका वास्तविक संवैधानिक सम्मान प्राप्त होगा, जिससे आने वाली पीढ़ियां अपनी मातृभाषा और गौरवशाली विरासत पर गर्व कर सकेंगी।

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