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लोकतंत्र की खामोश होती आवाज

विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में गिरती रैंकिंग और बढ़ते कड़े प्रतिबंध: क्या भारत के चौथे स्तंभ पर छंटेंगे खतरे के बादल? “पत्रकार बचेगा तो लोकतंत्र बचेगा।” यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि किसी भी जीवंत लोकतंत्र की आत्मा है। संविधान की प्रस्तावना में निहित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जब-जब खतरे में पड़ती है, तब-तब लोकतंत्र का

मानवता की मदद के लिए बनाई गई नेकी की दीवार चीन की दीवार से भी हो गई मजबूत

रतनपुर. आज के इस डिजिटल-युग मे रोज के रोज सोशल मीडिया के माध्यम से लोगो को नए-नए आइडिया, विचार,मिल रहे हैं भले ही आज का युवा-पीढ़ी सोशल-मीडिया में पॉजिटिव चीजो की जगह नेगेटिव चीजो पर ज्यादा फोकस करते हैं, पर इनके बावजूद कुछ युवा-पीढ़ी भी है, जो कि समाज के सही सोच के साथ समाज