सरकार नक्सली हमले में जान गवायें सेना के जवानों के पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने सुप्रीम कोर्ट में शीघ्र अपील करें – धनेन्द्र साहू
रायपुर. छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री छ.ग.शासन ने मुख्यमंत्री जी को पत्र प्रेषित करते हुए प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कहा है कि हाल ही में हाई कोर्ट द्वारा नक्सली घटनाओं के आरोपियों को शासन के द्वारा नियुक्त जांच एजेंसी एवं अधिवक्ताओं की टीम भी तथ्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने में असमर्थ होने के कारण की टिप्पणी करते हुए बरी कर दिया गया । यह फैसला एक बार फिर गंभीर चर्चा का विषय बन गया है। जब भी ऐसी बड़ी घटनाओं में बरी होने की खबर आती है, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या हमारी जांच एजेंसियां साक्ष्य जुटाने में कमजोर रही हैं या निर्दाेष लोग वर्षों तक जेल में बंद रहे? । अक्सर यह देखा गया है कि नक्सली प्रभावित क्षेत्रों में डर के मारे गवाह सामने नहीं आते। बिना ठोस सबूतों और गवाहों के, अदालत के पास बरी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। यह जांच प्रणाली पर एक सवाल खड़ा करता है जो कि जांच में कमी को दर्शाता है ।
उन्होने यह भी कहा है कि अगर कोई निर्दोष वर्षों तक जेल में रहता है और बाद में बरी होता है, तो उसके पुनर्वास की जिम्मेदारी किसकी है? कोर्ट का फैसला व्यक्ति की आजादी का सम्मान करता है, लेकिन पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की उम्मीद कमजोर करता है। आरोपियों के बरी होने से सुरक्षा बलों के मनोबल पर असर पड़ता है। साथ ही, इससे नक्सली विचारधारा को एक नया मौका मिलता है । सरकार से मेरा सुझाव एवं मांग है कि नक्सली मामलों में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट्स को और मजबूत करे, ताकि तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा सकें। न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाना और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करना ही इसका एक मात्र समाधान है, ताकि ना तो कोई निर्दाेष सजा पाए और ना ही कोई अपराधी बच निकले। नक्सली मामलों के लिए एक विशेष (लीगल) टास्क फोर्स बनाई जाए जो कोर्ट में मजबूत पैरवी करे। गवाहों को सुरक्षा देने के लिए विटनेस प्रोटेक्शन स्कीम को ग्रामीण स्तर पर लागू किया जाए। जो लोग निर्दोष पाए गए हैं, उनके पुनर्वास के लिए ठोस नीति बनाई जाए ताकि वे दोबारा गलत रास्ते पर ना जाएं।
उम्मीद है कि आप इस गंभीर विषय पर संज्ञान लेते हुए नक्सली हमला में मृतक केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों के पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने सुप्रीम कोर्ट में शीघ्र अपील करेंगे।


