लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन के 240 दिन पूरे, भूमि पट्टा मिलने तक संघर्ष जारी रखने का ऐलान
भीषण गर्मी और लगातार बारिश के बाद भी डटे हैं सैकड़ों परिवार
सैकड़ों महिला और बच्चे आंदोलन में शामिल
बिलासपुर। लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन ने रविवार को अपने संघर्ष के 240 दिन पूरे कर लिए। पिछले आठ माह से क्षेत्र के सैकड़ों परिवार अपने मकान और दुकानों को बचाने की मांग को लेकर लगातार धरने पर बैठे हुए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि भीषण गर्मी और लगातार बारिश के बावजूद उनका आंदोलन बिना रुके जारी है।
मालूम हो कि आंदोलन की शुरुआत कुछ ग्रामीणों के छोटे से विरोध प्रदर्शन के रूप में हुई थी, लेकिन समय के साथ यह जनआंदोलन का रूप ले चुका है। आंदोलनकारियों का दावा है कि शुरुआत में करीब 35 लोगों ने इसकी नींव रखी थी, जबकि आज सैकड़ों परिवार इस संघर्ष का हिस्सा बन चुके हैं। अपोलो रोड, दुर्गा चौक और राजकिशोर नगर क्षेत्र में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे पिछले कई महीनों से खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठे हैं। धरना दे रहे लोगों का आरोप है कि नगर निगम गार्डन और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के निर्माण की योजना के नाम पर लगभग 50 वर्षों से बसे परिवारों को हटाने की तैयारी कर रहा है। आंदोलन में यशोदा पाटिल, डॉ. रघु साहू, श्यामसुंदर कौशिक, अन्नपूर्णा धु्रव, सुखमती बाई, पिंकी देवांगन, प्रीति साहू, लता देवांगन, ललिता मानिकपुरी, रामबाई मानिकपुरी, साधना यादव, कल्पना यादव, जानकी देवांगन, कुंती प्रजापति, शिवकुमार देवांगन, अर्पणा पटेल, जयकुमार अहिरवार, प्रशांत मिश्रा सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और वार्डवासी उपस्थित रहे।
भूमि पट्टा देने निगम ने जमा कराई थी राशि
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि नगर निगम ने पूर्व में भूमि पट्टा देने के नाम पर लोगों से राशि जमा करवाई थी और उसकी रसीद भी जारी की गई थी। इसके बावजूद आज तक संबंधित परिवारों को भूमि का पट्टा नहीं दिया गया। उनका कहना है कि कई बार आवेदन और ज्ञापन सौंपने के बाद भी निगम प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। यह केवल मकान बचाने का संघर्ष नहीं, बल्कि वर्षों से बसे परिवारों के अधिकार और सम्मान की लड़ाई है। उनका आरोप है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है, जबकि प्रभावित परिवार लगातार समाधान की मांग कर रहे हैं।


