August 12, 2026
लोकतंत्र की खामोश होती आवाज
विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में गिरती रैंकिंग और बढ़ते कड़े प्रतिबंध: क्या भारत के चौथे स्तंभ पर छंटेंगे खतरे के बादल? “पत्रकार बचेगा तो लोकतंत्र बचेगा।” यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि किसी भी जीवंत लोकतंत्र की आत्मा है। संविधान की प्रस्तावना में निहित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जब-जब खतरे में पड़ती है, तब-तब लोकतंत्र का

