काबुल. अफगानिस्तान (Afghanistan) से इस वक्त बड़ी खबर सामने आ रही है. आतंकी संगठन तालिबान (Taliban) ने सुरक्षा की जिम्मेदारी हक्कानी नेटवर्क (Haqqani Network) को सौंप दी है. बता दें कि हक्कानी नेटवर्क का अलकायदा (Al-Qaeda) से संबंध है और पाकिस्तान (Pakistan) की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) हक्कानी नेटवर्क पर सीधे कंट्रोल करती है. हक्कानी नेटवर्क
वॉशिंगटन. अफगानिस्तान (Afghanistan) को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) ने तालिबान को चेतावनी देते हुए अपने हर नागरिक को सुरक्षित बाहर निकालने का वादा किया है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि अमेरिका की मदद करने वाले अफगानियों का भी ख्याल रखा जाएगा. राष्ट्रपति ने कहा कि
काबुल. अफगानिस्तान (Afghanistan) की राजधानी काबुल (Kabul) पर आतंकी संगठन तालिबान (Taliban) के कब्जे के बाद यहां सड़कों पर आतंकी खुलेआम घूम रहे हैं. हथियार लहरा रहे हैं, लोगों को धमका रहे हैं और पिछले समय में अमेरिका (US) की मदद करने वालों को ढूंढ-ढूंढ कर मार रहे हैं. इस बीच अमेरिका का मोस्ट वांटेड आतंकी
काबुल. तालिबान ने दावा किया है कि जर्मनी उसे मानवीय आधार पर आर्थिक मदद देने के लिए तैयार है. तालिबान का कहना है कि उसके शीर्ष नेता और अफगानिस्तान में जर्मन राजदूत के बीच हुई मुलाकात में इस पर सहमति बनी है. आतंकी संगठन ने कहा कि जर्मनी अफगानिस्तान को दी जाने वाली सैकड़ों मिलियन
काबुल. तालिबान (Taliban) के कब्जे के बाद अफगानिस्तान (Afghanistan) में भगदड़ मची हुई है. बड़ी संख्या में अफगानी इस उम्मीद में एयरपोर्ट (Airport) पहुंच रहे हैं कि शायद कोई उन्हें मुल्क से बाहर ले जाए. काबुल हवाईअड्डे के बाहर हजारों लोग मौजूद हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं. हर तरफ चीख-पुकार मची हुई
काबुल. अफगानिस्तान में तालिबान (Taliban) की दहशत लोगों के बीच इस कदर हावी है कि लोग किसी तरह देश छोड़ने की जल्दी में हैं. काबुल एयरपोर्ट (Kabul Airport) से 16 अगस्त को उड़ान भरने वाले एक विमान में जब जगह नहीं मिली तो तीन लोग टायर पकड़कर ही लटक गए थे, लेकिन वे फ्लाइट से
लंदन. अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी ब्रिटेन के विदेश मंत्री डॉमिनिक रैब (Dominic Raab) की कुर्सी के लिए खतरा बन गई है. माना जा रहा है कैबिनेट फेरबदल में प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (Boris Johnson) उन्हें बाहर का रास्ता दिखा सकते हैं. दरअसल, अफगान संकट को लेकर रैब ने जिस तरह का ढीला रवैया अपनाया उससे
काबुल. अफगानिस्तान (Afghanistan) की सबसे बड़ी पॉप स्टार आर्यना सईद (Aryana Sayeed) उन खुशकिस्मत लोगों में शामिल हैं, जो मुल्क छोड़ने में सफल रहे. आर्यना ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर तालिबान के चंगुल से बचने की जानकारी दी है. पॉप स्टार और अफगानिस्तान के ‘द वॉयस’ की जज आर्यना बुधवार को काबुल से रवाना हुए
संभल. उत्तर प्रदेश (UP) के संभल (Sambhal MP) से समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद डॉक्टर शफीकुर्रहमान बर्क (Shafiqur Rahman Barq) की मुश्किलें बढ़ गई हैं. उनके खिलाफ राजद्रोह का केस (Sedition Case Against SP MP) दर्ज कर लिया गया है. जिसके बाद डॉक्टर बर्क अपने बयान से पलट गए हैं. डॉक्टर बर्क ने कहा है कि
संयुक्त राष्ट्र. काबुल पर तालिबान के नियंत्रण (Taliban Control on Kabul) के बाद भारत समेत कई देशों के नागरिक वहां फंसे हुए हैं. इस बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S Jaishankar) ने कहा कि भारत अफगानिस्तान में बदलते घटनाक्रम पर ‘काफी सावधानीपूर्वक’ नजर रख रहा है और नई दिल्ली का ध्यान युद्धग्रस्त राष्ट्र
काबुल. अफगानिस्तान पर तालिबानी कब्जे के बाद महिला सैनिक (Female Afghan Soldiers) खौफ में हैं. उन्हें डर है कि तालिबान (Taliban) के आतंकी उनके साथ बलात्कार (Rape) कर सकते हैं, उनके परिवार को खत्म कर सकते हैं. 2011 में गर्व के साथ अफगान नेशनल आर्मी में शामिल हुईं कुबरा बेहरोज (Kubra Behroz) को अपने अपहरण,
काबुल. अफगानिस्तान पर तालिबान (Taliban) के कब्जे के बाद जहां मुल्क छोड़ने के लिए भगदड़ मची हुई है, वहीं ब्रिटिश राजदूत (British Ambassador) ने काबुल में ही रहने का फैसला लिया है. अपनी जान की परवाह न करते हुए राजदूत सर लॉरी ब्रिस्टो (Sir Laurie Bristow) ने साफ किया है कि जब तक 4000 ब्रिटिश और
काबुल. अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी (Ashraf Ghani) देश छोड़कर भाग गए हैं और राष्ट्रपति भवन समेत पूरे देश पर तालिबान (Taliban) को कब्जा हो गया. हालांकि तालिबान ने अभी तक अपना प्रतिनिधि नियुक्त नहीं किया है, जो अफगानिस्तान की सत्ता को संभाले. इस बीच अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह (Amrullah Saleh) ने खुद को
काबुल. अफगानिस्तान (Afghanistan) की राजधानी काबुल (Kabul) पर तालिबानी (Taliban) कब्जे के बाद भारत सहित कई देशों के नागरिक वहां से निकलने के लिए बेताब हैं, लेकिन उन्हें कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है. क्योंकि कमर्शियल फ्लाइट्स (Commercial Flights) फिलहाल बंद हैं. ऐसे में ये लोग किसी तरह छिपकर अपनी जान बचा रहे हैं. काबुल
वॉशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन (US President Joe Biden) ने अफगानिस्तान (Afghanistan) के हालात पर चुप्पी तोड़ते हुए अशरफ गनी (Ashraf Ghani) पर ठीकरा फोड़ दिया है. उन्होंने कहा कि गनी अफगानिस्तान को कठिन हालात में छोड़कर भाग गए. उनसे सवाल पूछा जाना चाहिए, वह बिना लड़े मुल्क से क्यों भागे? बता दें कि अपने
नई दिल्ली. सुरक्षा परिषद में अफगानिस्तान (Afghanistan) पर हुई चर्चा में पाकिस्तान को एंट्री नहीं मिली. इससे उसका सदाबहार दोस्त चीन बुरी तरह बौखला गया है. उसने इस मामले पर अफसोस जताया है. ये देश हुए बैठक में शामिल चीन ने कहा कि अफगानिस्तान के पड़ोसी देश (पाकिस्तान) सोमवार की बैठक में शामिल होना चाहते
काबुल. तालिबान (Taliban) के क्रूर शासन से बचने के लिए अफगानी मुल्क छोड़कर भाग रहे हैं. पूरे अफगानिस्तान (Afghanistan) में भगदड़ मची हुई है. काबुल हवाईअड्डे पर हजारों की संख्या में लोग मौजूद हैं. हर किसी की कोशिश बस किसी तरह देश से बाहर निकलने की है. इसी जद्दोजहद में उड़ते विमान से गिरकर कुछ लोगों
नई दिल्ली. अफगानिस्तान में तालिबानी युग की शुरुआत होने के बाद से ही वहां स्थिति भयावह बनी हुई है. आलम ये है कि वहां के रिहायशी इलाकों के रहने वाले हजारों-लाखों लोग अपना सबकुछ छोड़कर देश से निकलना चाहते हैं. इन दर्दनाक हालातों के बीच दिल्ली (Delhi) में रहने वाले अफगानी नागरिकों का उनके अपने
नई दिल्ली. अफगानिस्तान (Afghanistan) में तालिबान (Taliban) ने अमेरिकी सेना (US Army) के जाने के बाद ऐसा चौतरफा कोहराम मचाया कि आज अफगानिस्तान के दो-तिहाई इलाके और आधे से कई ज्यादा प्रान्तों पर कब्जा हो चुका है. तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे की रफ्तार का अंदाजा इसीसे लगाया जा सकता है कि काबुल भी सुरक्षित
काबुल. तालिबान (Taliban) ने अफगानिस्तान (Afghanistan) की राजधानी काबुल पर भी कब्जा कर लिया है. इसी के साथ अफगान में तालिबान शासन का रास्ता साफ हो गया है. राष्ट्रपति अशरफ गनी अपने कुछ करीबियों के साथ मुल्क छोड़कर चले गए हैं. शुरुआत में उप राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह (Amrullah Saleh) के भी विदेश जाने की खबर