हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में भारी वित्तीय और शैक्षणिक अनियमितता, विधायक देवेन्द्र ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग
भिलाई। भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने महामहिम राज्यपाल एवं कुलाधिपति रमेन डेका को पत्र लिखकर हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलपति डॉ. संजय तिवारी के खिलाफ कथित वित्तीय, प्रशासनिक एवं शैक्षणिक अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच कराने और कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
विधायक देवेंद्र यादव ने अपने पत्र में कहा है कि विश्वविद्यालय में लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं और कई मामलों में नियमों की अनदेखी कर निर्णय लिए गए हैं, जिससे विद्यार्थियों के भविष्य और विश्वविद्यालय की साख पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है कि मार्च 2026 में लगभग 12 लाख रुपए से अधिक की उत्तरपुस्तिकाओं की खरीदी के लिए निविदा प्रक्रिया अपनाई गई थी, लेकिन बाद में कुलपति द्वारा एक निजी फर्म के पक्ष में अर्द्धशासकीय पत्र जारी कर कार्य आवंटित किया गया और लगभग 40 लाख रुपए से अधिक का भुगतान भी किया गया। विधायक ने इसे शासकीय निविदा प्रक्रिया एवं वित्तीय नियमों के विपरीत बताया है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि विश्वविद्यालय द्वारा MBA, MCA, PGDBM सहित आठ नए पाठ्यक्रम प्रारंभ करने के लिए AICTE एवं RCI से निरीक्षण कराया गया, जबकि इसके पूर्व राज्य शासन से आवश्यक अनुमति प्राप्त नहीं की गई थी। साथ ही यह आरोप भी लगाया गया है कि एक ही विभागीय संरचना को परिवर्तित स्वरूप में प्रस्तुत कर विभिन्न पाठ्यक्रमों की मान्यता लेने का प्रयास किया गया।
विधायक ने नए पाठ्यक्रमों के लिए पुस्तकों की खरीदी में भी गंभीर अनियमितता का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि लगभग 40 लाख रुपए मूल्य की 380 पुस्तकों की खरीदी बिना विधिवत निविदा प्रक्रिया के केवल मौखिक निर्देशों पर की गई, जिससे पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में है।
पत्र में अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। विधायक के अनुसार शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने से पहले ही पांच विषयों के लिए 15 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई, जबकि संबंधित विभाग विधिवत अस्तित्व में नहीं थे और विद्यार्थियों का प्रवेश भी नहीं हुआ था।
इसके अलावा “English Legal Language” विषय की परीक्षा का उल्लेख करते हुए विधायक ने कहा कि लगभग 400 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। प्रश्नपत्र अंग्रेजी में था, जबकि लगभग 380 विद्यार्थियों ने उत्तर हिंदी में लिखे। प्रारंभिक परिणाम में उन्हें अनुत्तीर्ण घोषित कर दिया गया, लेकिन बाद में छात्र आंदोलन की आशंका को देखते हुए पुनर्मूल्यांकन कर सभी को उत्तीर्ण घोषित कर दिया गया। विधायक ने इसे विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली और शैक्षणिक गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न बताया है।
देवेंद्र यादव ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि कई महत्वपूर्ण वित्तीय विषयों को विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद के समक्ष अनुमोदन के लिए प्रस्तुत नहीं किया गया, जबकि नियमानुसार इसकी स्वीकृति आवश्यक थी।
विधायक ने महामहिम राज्यपाल से पूरे मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि विश्वविद्यालय की गरिमा एवं विद्यार्थियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।


