नौकरी मिली, एनओसी नहीं, हाईकोर्ट ने सरकार और आयोग से मांगा जवाब
उच्च शिक्षा सचिव और पीएससी को दिया अल्टीमेटम
120 दिन में जांच कर निर्णय लेने का दिया निर्देश
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति में कथित गड़बड़ी के मामले में सख्त रुख अपनाया है। राजनीति शास्त्र विषय के एक अभ्यर्थी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग के सचिव और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) को मामले की जांच कर उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानते हुए उच्च शिक्षा विभाग के सचिव और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग को पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि संबंधित सभी रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच कर कानून के अनुसार उचित निर्णय लिया जाए। साथ ही स्पष्ट किया कि जांच और निर्णय की पूरी प्रक्रिया 120 दिनों के भीतर पूरी की जाए।
दरअसल याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में दावा किया कि राजनीति शास्त्र विषय में एक अभ्यर्थी को आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र के बिना ही सहायक प्राध्यापक के पद पर नियुक्त कर दिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया कि नियुक्ति प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया, जिससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
नियमों के पालन पर रहेगा फोकस
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब यह जांच की जाएगी कि संबंधित अभ्यर्थी की नियुक्ति में सभी आवश्यक पात्रताओं और औपचारिकताओं का पालन किया गया था या नहीं। विशेष रूप से यह देखा जाएगा कि नियुक्ति के समय आवश्यक एनओसी प्रस्तुत किया गया था या नहीं, और यदि नहीं, तो नियुक्ति किन परिस्थितियों में की गई। यह मामला प्रदेश में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत का यह आदेश स्पष्ट संकेत देता है कि नियुक्तियों में निर्धारित प्रक्रियाओं की अनदेखी होने पर न्यायिक समीक्षा संभव है और संबंधित विभागों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है।


