पति का कर्ज, विधवा पत्नी से वसूली, एसबीआई को 19.90 लाख लौटाने का आदेश
इलाहाबाद. हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) एक कर्जदार व्यक्ति की मृत्यु के बाद ऋण वसूली के लिये उसकी विधवा के सावधि जमा कोष से निकाले गये 19 लाख 90 हजार रुपये फौरन वापस करने के आदेश दिये और बैंक के इस कदम को बैंकिंग नियमों का ‘घोर उल्लंघन’ बताया।
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने एसबीआई को निर्देश दिया कि वह महिला को एक लाख रुपये बतौर हर्जाना अदा करे, क्योंकि बैंक ने जिस तरह से बकाया रकम को वसूला, वह गलत था। अदालत ने यह आदेश नेहा मिश्रा नाम की महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। नेहा के पति लखनऊ के रिंग रोड स्थित मेडिसिन हॉस्पिटल में असिस्टेंट प्रोफेसर थे। उन्होंने नवंबर 2020 में एसबीआई से 15 लाख रुपये का ऋण लिया था। अदालत ने पाया कि महिला कर्ज लेने की प्रक्रिया में न तो सह-आवेदनकर्ता थी और न ही जमानतदार, क्षतिपूर्ति करने वाली या नॉमिनी थी और न ही उसका बैंक के साथ कोई सीधा अनुबंध था। दावा है कि कर्ज पर एक बीमा कवर लिया गया था जिसके लिए नेहा के पति ने 8,803 रुपये बतौर प्रीमियम राशि चुकाये थे। मई 2021 में कोविड-19 के दौरान नेहा के पति की मौत के बाद एसबीआई ने सितंबर 2025 में नेहा को कानूनी नोटिस भेजकर 13.87 लाख रुपये के बकाया कर्ज का भुगतान करने को कहा था।


