हरिओम अस्पताल पर मौत के बाद शव रोकने के आरोप, परिजन ने मचाया हंगामा

 

84 हजार रुपये बकाया मांगने का आरोप
अस्पताल प्रबंधन ने कहा शव नहीं रोका, पुलिस की कानूनी प्रकिया के चलते हुई देरी

बिलासपुर। शहर के हरिओम हॉस्पिटल में आदिवासी महिला की मौत के बाद शव परिजनों को सौंपने को लेकर गुरुवार को जमकर विवाद हुआ। कांग्रेस ने अस्पताल प्रबंधन पर मृतका का शव कथित तौर पर रोकने और बकाया राशि जमा करने की शर्त रखने का आरोप लगाया है। मामले को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अस्पताल पहुंचकर हंगामा किया और डॉक्टर से जवाब-तलब किया। बाद में वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय केशरवानी ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने शव रोकने और पैसे के लिए बंधक बनाने के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि महिला की मौत के बाद पुलिस को सूचना दी गई थी और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक शव सौंपना संभव नहीं था। मामला एमसीबी जिले के ग्राम नेउर, थाना कोराडोल निवासी आदिवासी महिला तिलबसिया से जुड़ा है।
परिजनों के अनुसार महिला पेड़ काटने के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। उन्हें 25 जुलाई को बिलासपुर के हरिओम हॉस्पिटल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार महिला की हालत बेहद गंभीर थी, जिसके चलते उसे सीधे आईसीयू में भर्ती किया गया। अस्पताल का दावा है कि उसी दिन तोरवा पुलिस को भी सूचना दी गई थी। विजय केशरवानी ने जिला दंडाधिकारी एवं कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि महिला की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने शव परिजनों को सौंपने से इनकार कर दिया और कथित तौर पर करीब 84 हजार रुपए की बकाया राशि जमा करने की बात कही। कांग्रेस के अनुसार मृतका के परिजनों ने इलाज के दौरान 21,780 रुपये जमा किए थे। साथ ही महिला का आयुष्मान कार्ड भी बना हुआ था। कांग्रेस ने मामले की जांच, अस्पताल प्रबंधन एवं संबंधित चिकित्सक के खिलाफ एफआईआर, मजिस्ट्रियल जांच और पीडि़त परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता हरिओम हॉस्पिटल पहुंचे और अस्पताल प्रबंधन के सामने अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने डॉक्टर से पूरे मामले को लेकर जवाब मांगा। विवाद बढऩे के बाद विजय केशरवानी भी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी और वहां से चले गए।

अस्पताल का पक्ष- शव रोकने का आरोप बेबुनियाद
हरिओम हॉस्पिटल के डॉ. अभिषेक कश्यप ने कांग्रेस के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि महिला को 25 जुलाई को बेहद गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था और तत्काल आईसीयू में भर्ती किया गया। डॉ. कश्यप के अनुसार मरीज की हालत लगातार बिगड़ रही थी। परिजनों की दिन में कई बार काउंसलिंग कर उन्हें मरीज की स्थिति के बारे में जानकारी दी जा रही थी। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि 28 जुलाई को मरीज की हालत अधिक खराब होने के बाद काउंसलिंग के दौरान मौजूद परिजन अस्पताल से चले गए। इसके बाद अस्पताल की ओर से परिजनों से संपर्क करने के कई प्रयास किए गए और नजदीकी थाने को भी इसकी जानकारी दी गई।

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