बिलासपुर उत्तरी बाईपास के लिए 8 गांवों की 644 खसरों की भूमि के क्रय-विक्रय और विभाजन पर रोक
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जारी किया आदेश
राष्ट्रीय राजमार्ग-130 के प्रस्तावित 4-लेन बाईपास के एलाइनमेंट क्षेत्र में अंतिम अधिग्रहण तक रहेगा प्रतिबंध
बिलासपुर. राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-130 पर प्रस्तावित बिलासपुर-उत्तरी बाईपास के 4-लेन निर्माण के मद्देनजर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए एलाइनमेंट क्षेत्र में आने वाली भूमि के क्रय-विक्रय एवं विभाजन पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह प्रतिबंध अंतिम भू-अधिग्रहण प्रक्रिया पूर्ण होने तथा आवश्यक अधिसूचना जारी होने तक प्रभावी रहेगा।
कलेक्टर के आदेश के अनुसार बिलासपुर-उत्तरी बाईपास के कि.मी. 0.000 से कि.मी. 20.921 तक प्रस्तावित 4-लेन निर्माण परियोजना के एलाइनमेंट क्षेत्र में आने वाली भूमि के क्रय-विक्रय और विभाजन पर रोक लगाई गई है। इस दायरे में बिलासपुर जिले के सेंदरी, रमतला, बिरकोना, नगोई, बिजोर, मोपका, दोमुहानी और ढेंका सहित 8 ग्रामों की कुल 644 खसरों की भूमि शामिल है। यह कार्रवाई भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा परियोजना क्षेत्र में प्रस्तावित भू-अधिग्रहण को देखते हुए की गई है।
परियोजना निदेशक, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना कार्यान्वयन इकाई बिलासपुर द्वारा इन क्षेत्रों में भूमि के अवैध एवं अनधिकृत क्रय-विक्रय की आशंका को देखते हुए प्रतिबंध लगाए जाने का अनुरोध किया गया था।शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 14 अक्टूबर 2024 को जारी निर्देशों के तहत भी भू-अर्जन प्रक्रिया के अधीन भूमि के अंतरण, बटांकन, व्यपवर्तन तथा क्रय-विक्रय को प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य भू-अर्जन की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित रखने के साथ मूल भूमि स्वामियों के हितों की रक्षा करना तथा शासन को होने वाली अनावश्यक आर्थिक क्षति को रोकना है।
आदेश में कहा गया है कि भू-अर्जन की प्रक्रिया के दौरान भूमि के अवैध अंतरण, बटांकन अथवा छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजन से अधिग्रहण की लागत में अप्रत्याशित वृद्धि होती है। साथ ही ऐसी गतिविधियों से सार्वजनिक हित की महत्वपूर्ण परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब की स्थिति निर्मित हो सकती है। प्रस्तावित बिलासपुर-उत्तरी बाईपास राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-130 पर लगभग 20.921 किलोमीटर लंबा 4-लेन मार्ग होगा। भूमि संबंधी प्रतिबंध परियोजना के लिए आवश्यक भू-अधिग्रहण प्रक्रिया को व्यवस्थित एवं सुचारू रूप से आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


