बेलतरा विधायक के बयान पर कांग्रेस नेता अंकित गौरहा की प्रतिक्रिया बोले—जनप्रतिनिधि से जिम्मेदार भाषा की अपेक्षा..

 

बिलासपुर. बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के बयान पर कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि विधायक की बयानबाजी उनकी राजनीतिक सोच और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति दृष्टिकोण पर सवाल खड़े करती है।गौरहा ने कहा कि सुशांत शुक्ला ने अपने बयान में गृह विभाग को लेकर हमारी व्यक्तिगत व्यवस्था जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है। गृह विभाग किसी व्यक्ति की निजी या व्यक्तिगत व्यवस्था नहीं,बल्कि संविधान,कानून और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत संचालित होने वाला महत्वपूर्ण सरकारी विभाग है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक पद पर बैठे जनप्रतिनिधियों से संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा और शब्दों की गंभीरता समझने की अपेक्षा की जाती है।उन्होंने कहा कि यदि विधायक के बयान का आशय कुछ और था तो उन्हें उसे स्पष्ट करना चाहिए,क्योंकि सरकार और शासन-व्यवस्था किसी व्यक्ति की निजी व्यवस्था नहीं,बल्कि जनता के प्रति जवाबदेह संवैधानिक व्यवस्था है।

 

युवा कांग्रेस के चुनाव को ‘गुंडों का समूह’ बताने पर सवाल

 

अंकित गौरहा ने सुशांत शुक्ला द्वारा युवा कांग्रेस के संगठन चुनाव को “गुंडों के समूह का चुनाव” बताए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संगठनात्मक चुनाव में युवा कार्यकर्ता लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत भाग लेते हैं और अपने प्रतिनिधियों का चयन करते हैं।गौरहा ने कहा,राजनीतिक विरोध करना हर दल का अधिकार है,लेकिन लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल युवाओं के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है। यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई आपराधिक मामला है तो कानून अपना काम करेगा,लेकिन पूरे संगठन और उसके चुनाव में शामिल युवाओं को एक ही नजर से देखना न्यायसंगत नहीं है।उन्होंने कहा कि बिलासपुर की घटना पर कानून व्यवस्था को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस हो सकती है,लेकिन उस बहस को युवा कांग्रेस के संगठन चुनाव से जोड़ना उचित नहीं है।

 

वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं पर टिप्पणी से राजनीतिक कद नहीं बढ़ता

गौरहा ने सुशांत शुक्ला द्वारा प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर लगातार की जा रही टिप्पणियों को लेकर भी कहा कि विपक्ष के नेताओं पर टिप्पणी करना राजनीति का हिस्सा हो सकता है,लेकिन इससे किसी जनप्रतिनिधि का राजनीतिक कद अपने आप नहीं बढ़ता।
उन्होंने कहा प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर टिप्पणी करने से किसी का राजनीतिक कद नहीं बढ़ता। भाजपा में भी किसी पद या जिम्मेदारी की अपेक्षा ऐसे बयानों के आधार पर नहीं की जानी चाहिए। बेहतर होगा कि विधायक जी अपनी जिम्मेदारियों और क्षेत्र के विकास के मुद्दों पर अधिक ध्यान दें।गौरहा ने कहा कि विपक्ष के नेताओं पर टिप्पणी करने के बजाय यदि विधायक अपने क्षेत्र की जनता से जुड़े मुद्दों,विकास कार्यों और जनसमस्याओं पर अधिक समय दें,तो यह जनता के लिए ज्यादा उपयोगी होगा।

 

राजनीति में भाषा भी जिम्मेदारी का हिस्सा

 

कांग्रेस नेता ने कहा कि जनप्रतिनिधि की असली पहचान उसके बयानों की तीव्रता से नहीं,बल्कि उसके काम,तर्क और जनता के प्रति जवाबदेही से होती है।उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र की स्वाभाविक प्रक्रिया हैं,लेकिन असहमति के बावजूद भाषा में मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। गृह विभाग जैसी संवैधानिक व्यवस्था को ‘व्यक्तिगत व्यवस्था बताना और राजनीतिक संगठन के चुनाव में शामिल युवाओं को ‘गुंडों का समूह’ कहना निश्चित रूप से गंभीर राजनीतिक सवाल खड़े करता है।अंकित गौरहा ने कहा कि बेलतरा की जनता राजनीतिक बयानबाजी से ज्यादा काम, जवाबदेही और जनहित को महत्व देती है। इसलिए जनप्रतिनिधियों को आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जनता के वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

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