छत्तीसगढ़ में सियासी रौब नहीं,जनहित की जवाबदेही दिखाने की जरुरत .. जयमाला सिंह

 

भाजपा नेताओं को बंद कमरे में नसीहत,विपक्ष को धमकी और जनता को सिर्फ आश्वासन! आखिर इस सियासी पटकथा का लेखक कौन?

रायगढ़.  छत्तीसगढ़ भाजपा प्रभारी स्मृति ईरानी के तेवर पर कांग्रेस की तेज तर्रार नेत्री जयमाला सिंह ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि स्मृति ईरानी जी छत्तीसगढ़ में भाजपा नेताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाने और विपक्ष को आंखें दिखाने आईं थीं,लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि छत्तीसगढ़ भाजपा की जागीर नहीं और यहां की जनता किसी की राजनीतिक जागीरदार नहीं है।
उन्होंने कहा कि अपने लिए दीदी,बहनजी जैसे संबोधन इस्तेमाल करने से कोई जनता का हितैषी नहीं बन जाता। दीदी कहलाने का सम्मान रिश्ते और व्यवहार से मिलता है, रौब दिखाने से नहीं। देश की महिलाओं को यह भी याद है कि महिला सम्मान की बातें करने वाले नेता विपक्ष में रहते हुए किस भाषा का इस्तेमाल करते हैं,और सत्ता में आने के बाद महिलाओं के वास्तविक सवालों पर कितनी गंभीरता दिखाते हैं।
यहां कांग्रेस नेत्री जयमाला सिंह ने सवाल उठाया कि यदि छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार और संगठन इतने ही मजबूत हैं,तो बाहर से आकर नेताओं को कठोर लहजे में समझाने की जरूरत क्यों पड़ रही है? क्या सरकार और संगठन के बीच सब कुछ ठीक नहीं है? क्या सत्ता के गलियारों में असंतोष की आवाजें इतनी बढ़ गई हैं कि अब उन्हें अनुशासन के डंडे से दबाने की कोशिश हो रही है? उन्होंने कहा कि स्मृति ईरानी जी को यह समझना चाहिए कि राजनीति में ऊंची आवाज नेतृत्व का प्रमाण नहीं और विपक्ष को ललकारना उपलब्धि नहीं है।असली नेतृत्व वह है जो जनता की तकलीफ सुने,अपने नेताओं को जवाबदेह बनाए और वादों को जमीन पर उतारे।जयमाला सिंह ने भाजपा नेताओं को चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि सत्ता के नशे में जनता की ताकत को कम आंकने की भूल न करें। बंद कमरों में बैठकें करके कार्यकर्ताओं को संदेश दिया जा सकता है, लेकिन जनता के मन में क्या चल रहा है, इसका फैसला कोई प्रभारी नहीं कर सकता। छत्तीसगढ़ की जनता न सिर्फ़ मौन होकर यह सब देख रही है बल्कि आपके प्रधान नेतृत्व के संबंधों को भी भली भांति समझ भी रही है। छत्तीसगढ़ की जागरूक जनता वक्त आने पर अपना जवाब भी देती है। जयमाला सिंह ने कहा कि स्मृति ईरानी जी विपक्ष को नसीहत देने के बजाय अपनी सरकार के कामकाज का हिसाब दें। छत्तीसगढ़ में जनता को दीदीगिरी नहीं, जवाबदेही चाहिए; राजनीतिक रौब नहीं,सुशासन चाहिए। भाजपा नेताओं को भी याद रखना चाहिए कि कुर्सी की ताकत उधार की होती है, लेकिन जनता की ताकत स्थायी होती है।

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